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तिल का उपयोग और लाभ

तिल का उपयोग और लाभ

  • ४ तोले काले तिल की दाल ठंडी करके नियमित खाने से बवासीर अवश्य समाप्त करेगा।
  • काले तिल २ तोले, अजवायन १ तोले जल से काढ़ा बना कर २ छटाँक रहने पर पुराण गुड़ डालकर पीजिये दर्द होकर मासिक आना बंद हो जायेगा।
  • तिल दूध में डालकर उनसे स्नान कीजिए, जिगर के कष्ट समाप्त होंगे।
  • तिल पीसकर गर्म करके पानी के साथ पिने से स्त्रियों के स्तनों में दूध अधिक उतरेगा।
  • तिल पीसकर गौ-मूत्र में पकाकर फोड़े पर बाँधने से वह ठीक हो जायेगा।
  • तिल चार भाग, सौंठ एक भाग, अखरोट की गिरी दो भाग कूटकर मीठा पानी मिलकर खाने से वायु का दर्द ठीक होकर बल मिलता है।
  • तिल भूनकर थोड़ा सा गुड़ मिलाकर ४ ४ तोले के लड्डू जैसा बनाकर सुबह शाम खाने से अधिक पेशाब आना रुकेगा।
  • ३-४ तोले तिल नित्य रत को खूब चबाने के बाद यदि ठंडा पानी पियें तो दन्त मजबूत होंगे।
  • मूली खाने के बाद यदि कोई विकार बन जाए तो तिल को चबाएं।
  • तिल पानी में पीसकर घाव पर बांधिए, घाव शीघ्र भर जाएगा।
  • तिल पांच भाग, बादाम की गिरी एक भाग, मुनक्का एक भाग, पीपल एक भाग, गोला नारियल का एक भाग सब कूटकर और मिलकर इस्तेमाल करने से पाचन शक्ति बढाकर बल बृद्धि भी करता है।
  • तिल, अलसी, होली राई, मेवा, गिरी, मावा महीन कूटकर तिल का तेल डालकर गर्म करके पानी डालिए सहता -सहता घुटने व् जोड़ों पर बांधिए, डेढ़ दो महीने के इस्तेमाल से जुड़े अंग चालू और दर्द समाप्त करेगा।

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