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गेंहूँ के फायदे और उपचार।

Feed by sandy Cat- Health & Beauty

गेंहूँ एक अन्न है और अन्न से ही हमारा जीवन है। अन्न की ही ईश्वर से तुलना की गयी है। आओ इस अन्न के गुणों को जाने:-

पेशाब के बाद सफ़ेद कतरा वीर्य का निकलना :

यह एक ऐसा रोग है की जिसके कारण लाखों युवक चिंतित नजर आतेहै अपनी चिंता को दूर करने के लिए वे विज्ञापन छाप डाक्टरों के पीछे जातें है। और वे लोग ज़रा सी बात को इतना बढ़ा चढ़ा कर बताते है की जगी दर के मारे काँप उठता है। रोग न होते हुए भी वह अपने को रोगी महसूस करने लगता है।

पेशाब के बाद सफ़ेद कतरा आना वास्तव में एक रोग तो है परंतु ऐसा रोग नहीं है की आप इन ठगों के हाथों लूट जाएं। इस रोग का उपचार गेंहू द्वारा किया जा सकता है।

१०० ग्राम गेहूं को रात में समय पानी में भिगो दें। सुबह उसी पानी में उसे पीसकर मसलकर लस्सी बना लें। इसमें दो-चार चम्मच चीनी मिलाकर सात दिन तक निरंतर सुबह के समां पीते रहने से सफ़ेद कतरा आने का रोग ठीक हो जाएगा।

पेचिश :

सौंफ को पीस कर उसे छान कर पानी में मिला लें। इस पानी से गेंहू का आता गूंथ कर उसकी रोटी रोगी को खिलाने से पेचिश रोग ठीक हो जाता है।

सूजन के लिए :

शरीर के किसी भी भाग में किसी भी कारण से सूजन हो तो गेहूं को पानी में उबालकर उसे नीचे उतारकर थोड़ा गर्म रहने पर सूजन वाले स्थान पर हल्के हाथ से कपडे के साथ टकोर करते रहें तो सूजन ठीक हो जाएगी।

चर्म रोग :

जो लोग खारिश खुजली तथा अन्य चार्म रोगों के कारन चितिंत है उनके लिए उपचार :

  • थोड़े गेहूं के दाने हल्के गर्म तवे पर भून लें। अब भुने हुए गेहूं को किसी भी बर्तन में कूट पीस कर कपडे से छान लें इसके पश्चात सरसों के तेल में मिला कर चर्म रोग वाले स्थान पर लेप करें। तो आप चार्म रोगों से कुछ दिनों में मुक्ति पा जाएंगे।
  • यदि अधिक खुजली होती हो या कोइ भाग आग से जल गया हो तो गेहूं के आते को पानी के साथ गूंथ कर उस स्थान पर लेप करेंगे तो शीघ्रः आराम आएगा।

खांसी : खासी रोगियों के लिए उपयोगी नुस्खा इस प्रकार है : - गेहूं २५ ग्राम, सेंधा नमक १० ग्राम, पानी २५० ग्राम इन सब को रात के समय भिगों कर रखें। सुबह उठकर हल्की आंच पर पकाएं। जब पानी तिहाई रह जाए तो उसे नीचे उतार कर छानकर ठंडा करके सुबह शाम दो समय पीने से पुराणी खांसी चली जाएगी।

पेशाब करते वक्त जलन :

जलन कर पेशाब आना भी एक रोग है। इसका सरल और घरेलु उपचार इस प्रकार है : गेंहू १५ ग्राम, पानी २५० ग्राम रात के समय इनको किसी मिट्टी के बर्तन में भिगो दें। सुबह उठाकर इनको पीसकर बारीक छलनी से छान कर उस रस में कुजा मिश्री मिलाकर चालीस दिन तक निरंतर पीने से पेशाब के लग क्र आने का रोग ठीक हो जाएगा।

पथरी का इलाज : पथरी रोगियों के लिए गेहूं और चने को मिलाकर इसे हल्की आंच पर अच्छी तरह पका लें। जब पानी आधा रह जाए तो उसे नीचे उतारकर किसी छलनी से छान लें। छने हुए पानी का एक मास तक पीने से पथरी कट कट कर पेशाब के रास्ते से बाहर निकल जाएगी।

नपुंसकता (मरदाना कमजोरी) :

गेहूं को बारह घंटे तक पानी में भिगो कर रखें। इसके पश्चात किसी मोठे कपडे से चौबीस घंटे तक बांधकर रखें। ऐसा करने से जब उस कपडे को खोलोगे तो गेहूं के अंकुर फुट आएँगे, अब इस अंकुरित गेहूं को कच्चा ही खा लें। यदि चाहें तो इसमें थोड़ी से चीनी या किशमिश मिला कर उपयोग कर सकते है। ऐसा एक महीने तक करने से आपके शरीर की खोयी हुई शक्ति वापस आ जाएगी।

एक बात पाठकों को ध्यान में रखनी चाहिए की हेहूँ के अंकुर जब भी इस तरीके से निकालेंगे तो जो भी मानव इन का सेवन एक महीने तक करेगा उसका शरीर निरोगी तथा शक्तिशाली होगा। शक्ति प्राप्त करने के लिए इससे सस्ता और उपयोगी और क्या साधन होगा।

गेहूं का पौधा अति गुणकारी तथा रोग नाशक :

आज के युग में केवल बनावटी और ऊपरी दिखावे तथा झूठे की ही जय जयकार हो रही है। हम आजादी के पश्चात भी अंगरेजी दवाओं की ओर भाग रहे हैं। जिस देश में धनवंतरी जैसा वैध पैदा हुए जो मौत के मुख से रोगी को निकाल लाने की बुद्धि रखते थे। संजीवनी जैसी अनेकों जड़ी बूटिया हमारे देश में ही पैदा होती है। रोग भागने में इनका अपना योगदान किसी महाशक्ति से कम नहीं। 'गेहूं' का एक पौधा भयंकर से भयंकर रोगों को ठीक करने में सफल हो सकता है तो शेष जड़ी बूटियां तो अनेकों रोगों को दूर करने में सफल हो सकती है। परंतु मुझे तो दुःख इस बात का है की लोग इस ओर ध्यान ही नहीं देते शायद "घर का जोगी जोगड़ा बाहर का जोगी सिद्ध।"

यही उदाहरण हम पर लागू होता है। प्रकृति ने जो उपहार हमें अपनी ओर से दिया है इसे हम समझ नहीं पा रहे। गेहूं उस उपहार का एक ऐसा अंश है जिसे हमारे यहां "अन्न भगवान्" कहा जाता है। अब इन गुणों के विषय में आपको अवगत करता हूँ :-

गेहूं के पौधे में शरीर का शोधन करने और स्वस्थ रखने की अद्बुत शक्ति है। भले ही हम भारतीय इस शक्ति के ज्ञान से पर है। जबकि अमेरिका की एम हिलाडाक्टर ने अपने विचार इस विषय में प्रकट किए हैं जो एक बहुत बड़ी पुस्तक द्वारा हम तक पहुंचे है। उस पुस्तक का नाम "WHEAT GRAS MANA" उस महिला डाक्टर का नाम है डा इन विगमोर।

इस पुस्तक में उन्होंने गेहूं के बारे में अपने अनुभवों के आधार पर हजारों रोगियों को गेहूं के आटे के पौधे का रस देकर कठिन से कठिन रोगों का भी उपचार किया है। उनका यह उपचार काफी सफल रहा है।

"WHEAT GRAS JUICVE" से ऐसे अमेरिकन रोगी ठीक हो गए जिन्हें डाक्टरों ने जवाब दे दिया था। उन्होंने गेहूं की सहायता से भगदड़, ववासीर, गठिया, बुखार, खांसी, दमा जैसे रोगों का भी उपचार किया। बुढापे की कमजोरी को तो दूर करना हेहूँ का पौधा अपने जन्म से लेकर अंत तक मानव जीवन की रक्षा करता है।

गेहूं का जूस बहुत सफल उपचार का माध्यम है। इसे तो विदेशी स्वास्थ्य विद्यानों ने भी माना है। परंतु एक बात सदा याद रखें की इस जूस को अधिक समय तक निकाल कर नहीं रखा जा सकता है। अधिक से अधिक तीन घंटे तक ही शक्ति बनी रहती है। इसके बाद तो इसको पीना न पीना बराबर होता है।

सत्य बात तो यह है की गेहूं के रूप में प्रकृति ने मानव जाती को अमृत दिया है। अब मानव का यह फर्ज है की इसका लाभ स्वयं ही उठाए। जिन लोगों के बाल सफ़ेद हैं वे यदि हेहूँ का रस कुछ दिनों तक पिएंगे तो सफ़ेद बाल जड़ से काले हो जाएंगे। हेहूँ के पौधे का रस गेहूं के रस से कहीं अधिक तेज होता है। छोटे बच्चों के लिए भी घेहूँ का रस बहुत उपयोगी होता है यदि चार -पांच बून्द यह रस दिन में दो बार देते रहे तो वे अनेक रोगों से बचे रहेंगे। गेहूं का रस जिनलोगों ने सेवन किया है उनका यह मत है की "इससे आँख, नाक, कान, दन्त ओर बालों के रोग ठीक हो जाते है।"

परहेज : गेहूं का रस सेवन करने वालों को केवल हल्का भोजन ही लेना चाहिए। भारी भोजनों से बच कर रहें में ही इसका पूरा लाभ उठाया जा सकता है।

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