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सुजाक रोग क्या है? और उपचार

Feed by sandy Cat- Health & Beauty

इस सूजाक रोग का संबंध ‘साइकोसिस’ से होता है। इस रोग की उत्पत्ति संक्रामक कारणों से छूत लगने पर होती है। सूजाक रोग से ग्रस्त स्त्री या पुरुष से सहवास करने वाले स्त्री या पुरुष को यह रोग हो जाता है। ‘निसेरिया गोनोरियाई’ नामक जीवाणु द्वारा यह रोग होता है। जननांगों की उचित सफाई न होने पर इस रोग की सम्भावना बढ़ जाती है। इस रोग की तीन अवस्थाएं होती हैं –

पहली अवस्था : जब इस रोग का आक्रमण होता है, तब मूत्र नलिका में खुजली चलने, सरसराहट होने और अन्दर उष्णता का अनुभव होने लगता है। मूत्र द्वार से दूध जैसा सफेद मवाद (पीब) आना इस रोग की पहली अवस्था होती है।

यह बीमारी स्त्री पुरुष दोनों को हो जाती है, अत: सुजाक से ग्रस्त स्त्री पुरुष सहवास न करें, पुरूषों को चाहिए की वह वेश्याओं के पास न जाएं।

फिटकरी का चूर्ण २ माशे नित्य जल से खाइये, सुजाक में हितकर होगा।

गरी का फूल, केले का फाऊल ५०-५० ग्राम मिलेरमानी रूमी मस्तगी दस २ ग्राम बंसलोचन ५ ग्राम, सबका चूर्ण बना लीजिए सौ मि० ग्राम में तीन बार ताजे पानी से दें सुजाक तथा गर्मी के लिए उत्तम दवा है।

 

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