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कुछ रोग और उसके घरेलु निचोड़ उपाय

Feed by sandy Cat- Health & Beauty

नींद अधिक आने पर

सौंफ ६ ग्राम आधा किलो पानी मन उबालो, एक कप बचे थोड़ा नमक दाल कर रात में ४-५ बार पियें, नींद न आवेगी।

 

नींद ना आना

यदि ब्लडप्रेशर वाले मरीज को नींद न आये तो रात में ५० ग्राम सोया उसके सिरहाने रखे नींद आ जाएगी।

 

तिल्ली

इसमें पेट की बायीं तरफ सूजन और सख्ती होती है और हाथ पैर सूज जाते है।

खाली पेट मूली सेंधा नामक डालकर सुबह खाइये।

सज्जी ४ माशे गुड़ मिलाकर इक्कीस दिन ले जबकि अन्य ओषधियों से आराम न पड़ा हो।

नॉसादर और चुना समान लेकर दोनों मिलाकर रात को ओस में रखें सुबह वः तेल बन जाएगा उसे शीशी में रखें। एक बूँद बतासे में डालकर नित्य खाएं, तिल्ली नष्ट होकर पाखाने के द्वारा काट जाएगी।

झाऊ के सूखे पत्ते पीसकर ३ माशे शक्कर के साथ खाने चाहिए।

तिल्ली पर आल बाँधने से उसी दिन या ५-६ दिन में आराम मिलेगा।

 

लू लगना

गर्मी के दिनों में बेल का शरबत पीने से लू नहीं लगती और जलन दूर करके शक्ति देता है।

 

दाद

नारियल की जटा के अंदर का एक भाग का दुकड़ा सिल पर गिस्कार लगाने से दाद नष्ट हो जाता है।

 

दाद खाज

तुलसी की पत्ती ५ टोले और बराबर कालीमिर्च बारीक पीसकर चने बराबर गोली बनाकर छाया में सुखाएं और दाद के ऊपर लगाएं कुछ ही दिनों में दाद सदा के लिए समाप्त हो जाएगा। यही दवा पेट की कीड़े निकालने व् सर्दी के ज्वर को उतारने में भी सहायक है। इन बीमारियों में जल के साथ गोली इस्तेमाल करें।

 

पुराणी खाज की दवा

नीला थोथा, कपुर, कालीमिर्च, कत्था। सबको लेकर एकत्रित करके पीस लें और सकोरे में डालकर फिर उसे जलाकर शेषी में बार लें, पहले साबुन सेखुजली की जगह साफ़ करके दवा मलें।

 

सर चकराना

गर्मी के दिनों में सर चकराना या जी घवरानातो तब आंवले का शर्बत पिएँ., तुरंत शान्ति मिलेगी।

 

दिल की धड़कन

जिन सज्जनों का दिल अत्यधिक धड़कता हो वे १ छटांक आंवले के मुरब्बा पर दो चांदी के बारक लगाकर कुछ दिन लें बहुत लाभ मिलेगा।

 

आग में जलने पर

कच्ची गाजर को पीसकर आग के जले स्थान पर लगाओ जलन ठीक होगी।

गर्म तेल में कपूर पीसकर मिला दें। ठंडा होने पर दिन में ४-५ बार जले स्थान पर लगाएं और जले स्थान पर शीघ्र सरसों का तेल लगाने से छाले नहीं पड़ते।

जले स्थान पर कच्चा आलू पीसकर लगावें। जलन दूर होगी और फफोले नहीं पड़ेंगे।

 

फफोले

उपचार: ओरजार से काट जाने पर शीघ्र उसी स्थान पर पेशाब करने से घाव पके का दर नहीं रहता।

अंडे के तेल में छूना खूब फेंटकर लगाने से गाव पकता नहीं है और न टिटनिश का भय रहता है।

पिसी हल्दी घी या तेल में मिलाकर बांधे और नित्य कपड़ा बदल दें। २-३ दिन में गाव ठीक हो जाएगा।

गिरी के तेल में नींबू कर रस मिलाकर लगाने से गाव नहीं पकता।

तुकमलगा पानी में भिगोकर फोड़े पर बांधो यदि बैठने की हालात में होगा तो बैठ जाएगा अन्यथा पकाकर मवाद को निकाल देगा।

नीम की पत्ती अहद के साथ पीसकर लेप करें फोड़ा पककर फुट जाएगा। नीम के पत्ते पीसकर घी दाल गर्म करें और घाव पर लगाएं, वह सूख जाएगा।

 

फुंसियां

नीम की छाल गिस्कार चन्दन जैसी बना दो और उसे ही फुंसियों पर लेप करो लाभ होगा।

अनन्नास का गूदा फुंसियों पर लगाने से लाभप्रद होता है।

 

मुख के छाले

मुंह, जीभ, यह आदि में छाले पड़े तो पेट की खराबी से होता है। मुख से लहार बहाने लगती है। लाल, सफ़ेद रंग के दाने पद जाते है, पेट की सफाई रखना जरूरी है। कब्ज न होने दें।

गाय के दही के साथ एक केला खाने से मुख के छाले सही होंगे। टमाटर खूब इस्तेमाल करें। छालों में अधिक टमाटर लाभप्रद है।

घी दस ग्राम, कपूर ३ ग्राम करम करके छालों पर लगाओ ठीक हो जाएंगे या अरहर की दाल खाएं।

 

कुछ उपयोगी नापतोल: 8 चावल = 1 रत्ती | 8 रत्ती = 1 माशा | 4 माशा =1 टंक, 12 माशा = 1 तोला | 5 तोला = 1 छटांक | 4 छटांक = 20 तोला या 1 पाव | 8 छटांक या 40 तोला = 1 अधसेरा | 16 छटांक या 80 तोला = 1 सेर | 5 सेर = 1 पसेरी | 8 पसेरी = 40 सेर या 1 मन | 1 केजी = 86 तोला या 1 सेर 6/5 छटांक | 100 केजी = 1 क्विंटल या 2 मन 27 5/2 सेर।।. Read more at: http://fastread.in/explore.php

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