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कोढ जमाम भगन्दर नासूर का अचूक उपाय।

Feed by sandy Cat- Health & Beauty

जनाब बूटी जड समेत 4 छटांक को खूब बारीक करके 1 तोला सम्बुलफार के साथ खरल करके चना बराबर या छोटी-बडी गोली रोगी की क्षमता के अनुसार दें। दवा मक्खन या मलाई मिलाकर 40 दिन तख खायें। ये नासूर, भगन्दर, पुराने घाव में मुफीद है। बच्चों को सम्बूलफार की बजाय काली मिर्च डालकर गोली बनाकर दें।

दुसरा उपाय : रस कपूर 3 तोले को चावल की तरह बनाकर एक चोकला प्याज में गड्ढा करके रखें और प्याज के टुकडे से गड्ढे को बन्द करके 2 दिन तक प्याज को पानी में उबालने के बाद फिर रस कपूर निकाल सिगरफ एक तोले, लौंग एक माशे के साथ अदरक के 3 तोले रस में खरल करें और 4 तोला दालचीनी मिलाकर बाजरे के बराबर गोली तैयार कर एक एक गोली सुबह शाम मलाई से खाने से कोढ दुर होगा।

सममुलफार 2 तोले ढाई सेर बकरी के दूध में खरल करके खुश्क करे और एक रत्ती मलाई में दोनों समा दें।

जरे नेग तबकी, जहर हल्दिया, सुधा हुआ पारा, शुक एक-एक तोले को घी ग्वार के रस में आठ घंटे खरल करके गोली बनाओ और फूंकी हुई कौडी में गोली रखकर नये कपडे में मिला हिकमत करें। सूखने पर ढाई सेर उपलों की आग जलावें। ठण्डा होने पर गोली निकालें वह सफेद रंग की फूली हुई होगी। राई बराबर दवा मुन्नका में दें। जब बदन में अत्यंत गर्मी महसूस होने लगे तो तालाब में बिठा दें, बदन साफ हो जायेगा।

 

पारम्परिक भारतीय वज़न इस प्रकार हैं[1] -

४ धान की एक रत्ती बनती है, ८ रत्ती का एक माशा बनता है, १२ माशों का एक तोला बनता है, ५ तोलों की एक छटाक बनती है, १६ छटाक का एक सेर बनता है, ५ सेर की एक पनसेरी बनती है, ८ पनसेरियों का एक मन बनता है, या पुराने भारतीय नाप-तौल :- 8 खसखस = 1 चावल,

8 चावल = 1 रत्ती, 8 रत्ती = 1 माशा, 4 माशा =1 टंक, 12 माशा = 1 तोला, 5 तोला = 1 छटांक, 4 छटांक = 20 तोला या 1 पाव, 8 छटांक या 40 तोला = 1 अधसेरा, 16 छटांक या 80 तोला = 1 सेर, 5 सेर = 1 पसेरी, 8 पसेरी = 40 सेर या 1 मन, 1 केजी = 86 तोला या 1 सेर 6/5 छटांक, 100 केजी = 1 क्विंटल या 2 मन 27 5/2 सेर।

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