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कान के रोग पर क्षार तेल

Feed by sandy Cat- Health & Beauty

मूली का रस, अदरक का रस, पांचों नमक, सेंधा, सामर, विड सामर, ऊसर का सादा नमक, हींग, सहजने की छाल, सौंठ देवदारु, सौंफ, बचरसोत, पीपरामूल, नागरमोंथा सत्रह दवाओं को एक एक तोला से कल्क कर कल्क से चौगुना तिल का तेल से चौगुने केला के कन्द का रस बिजारे का रस (मधयुक्त) लेकर कढाई में डालकर छान बोतल में भरे (मधुसूक्त का तादाद) कागी नींबू का रस दो सेर, एक कडुवे शहर पीपर का चूर्ण एक पल बरतन में बनद कर मिट्टी से लेप यानी मुखमुद्रा कर अनाज में दबाओं, 15 दिन इसको मधुयुक्त कहते है, कान से पीव, राध का बहना, कर्ण नाद-कान में आवाज होना कर्ण शूल-कान का भयंकर दर्द, कर्णवन्धिता ऊंचा सुनना बहरापन आदि समस्त रोग नष्ट होते है, इसे ही मुख के रोगों पर लगाने से फौरन फायदा होता, जैसे दाढ दंत कीडा और पायरिया।

पारम्परिक भारतीय वज़न इस प्रकार हैं -

४ धान की एक रत्ती बनती है, ८ रत्ती का एक माशा बनता है, १२ माशों का एक तोला बनता है, ५ तोलों की एक छटाक बनती है, १६ छटाक का एक सेर बनता है, ५ सेर की एक पनसेरी बनती है, ८ पनसेरियों का एक मन बनता है, या पुराने भारतीय नाप-तौल :- 8 खसखस = 1 चावल,

8 चावल = 1 रत्ती, 8 रत्ती = 1 माशा, 4 माशा =1 टंक, 12 माशा = 1 तोला, 5 तोला = 1 छटांक, 4 छटांक = 20 तोला या 1 पाव, 8 छटांक या 40 तोला = 1 अधसेरा, 16 छटांक या 80 तोला = 1 सेर, 5 सेर = 1 पसेरी, 8 पसेरी = 40 सेर या 1 मन, 1 केजी = 86 तोला या 1 सेर 6/5 छटांक, 100 केजी = 1 क्विंटल या 2 मन 27 5/2 सेर।

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