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बालकों के सूखा रोग

Feed by sandy Cat- Health & Beauty

मधु मक्खी छोटी वाली के शहद का छत्ता जो शहद रस के उपरी भाग में रहता है और उसमें मक्खियों के अण्डे रहते है। जिन्हें पोल्या कहते है। उसी उपर वाले भाग को (जिसमे शहद न हो) लेकर हाथों से दवाकर उसका रस एक प्याले में निकालो। वह सफेद रंग का निकलेगा। फिर उसमें इतनी शक्कर मिलाओं कि वह गाढ हो जाए। बस दवा तैयार हो गई। इसमें से बच्चे को अवस्थानुसार सूखा के रोगी को खाने को दे। बच्चा मीठा होने की वजह से खा जाएगा और सूखा रोग समूल नष्ट हो जायेगा।

पारम्परिक भारतीय वज़न इस प्रकार हैं -

४ धान की एक रत्ती बनती है, ८ रत्ती का एक माशा बनता है, १२ माशों का एक तोला बनता है, ५ तोलों की एक छटाक बनती है, १६ छटाक का एक सेर बनता है, ५ सेर की एक पनसेरी बनती है, ८ पनसेरियों का एक मन बनता है, या पुराने भारतीय नाप-तौल :- 8 खसखस = 1 चावल,

8 चावल = 1 रत्ती, 8 रत्ती = 1 माशा, 4 माशा =1 टंक, 12 माशा = 1 तोला, 5 तोला = 1 छटांक, 4 छटांक = 20 तोला या 1 पाव, 8 छटांक या 40 तोला = 1 अधसेरा, 16 छटांक या 80 तोला = 1 सेर, 5 सेर = 1 पसेरी, 8 पसेरी = 40 सेर या 1 मन, 1 केजी = 86 तोला या 1 सेर 6/5 छटांक, 100 केजी = 1 क्विंटल या 2 मन 27 5/2 सेर।

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