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हिमालय के सत्यगिरी साधु का योग

Feed by sandy Cat- Health & Beauty

एक पाव बारीक लोग चूर्ण, 12 पाव पीली कौडी, एक छटांक नौसादर ठीकरी का लें, 1 सेर नींबू का रस किसी मिट्टी के चिकने बरतन में भून कर ऊपर से मुलतानी मिट्टी से मुख मुद्धा करें। दो दिन तेज धूप में रखे फिर एक महीने जिस जगह धूप पडे वहां जमीन में गाड दें और एक महीने बाद निकाल लें।

अब आप आबर पर एक सेर पानी में दो बार उबाल कर उस पानी को दवा में मिलाकर कपडे में छानकर बोतल में भरलें और उस में डाट लगाकर रख दें, बस दवा तैयार है, मात्रा एक छोटी चम्मच दिन में दो या ती बार, प्रयोग करें, खून की कमी, पीलिया, पंडु जिग, तिल्ली, पेट दर्द, अफरा, मन्दाग्नि, गदहजमी, उदर रोग की रामबाण दवा है।

पारम्परिक भारतीय वज़न इस प्रकार हैं -

४ धान की एक रत्ती बनती है, ८ रत्ती का एक माशा बनता है, १२ माशों का एक तोला बनता है, ५ तोलों की एक छटाक बनती है, १६ छटाक का एक सेर बनता है, ५ सेर की एक पनसेरी बनती है, ८ पनसेरियों का एक मन बनता है, या पुराने भारतीय नाप-तौल :- 8 खसखस = 1 चावल,

8 चावल = 1 रत्ती, 8 रत्ती = 1 माशा, 4 माशा =1 टंक, 12 माशा = 1 तोला, 5 तोला = 1 छटांक, 4 छटांक = 20 तोला या 1 पाव, 8 छटांक या 40 तोला = 1 अधसेरा, 16 छटांक या 80 तोला = 1 सेर, 5 सेर = 1 पसेरी, 8 पसेरी = 40 सेर या 1 मन, 1 केजी = 86 तोला या 1 सेर 6/5 छटांक, 100 केजी = 1 क्विंटल या 2 मन 27 5/2 सेर।

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