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प्रमेह रोग का इलाज

प्रमेह का नाम असमय धातु गिरने के रोग का ही है। जो महिला समय पर रजत्वया होती है, नियमानुसार रहती है उन्हे यह बीमारी नही होती।

कारण : यह बीमारी उस समय होता है जब ठीक समय पर महावारी न हो, मैथुन अधिक होता हो और समय कुसमय का विचार न किया जाता हो दिन के मैथुन करने से भी यह बीमारी हो जाती है इसलिए बचना चाहिए।

समय पर महावारी न आना एक विशेष है।

औषधि : 1. कुश की जड लेकर चावलों के पानी में पीस तीन दिन दे उदर का रोग जड से चला जाएगा।

2. अडूसा भिलांवा, नागरमोंथा, दारुहल्दी, रसौत, चिरायतां, बेलगिरी इन सबको आवश्यकतानुसार पानी में डाल क्वाथ बना लिया जाए। उसे देशी घी में भूना जाय और जब पक जाय तो श्याम के वक्त शहद मिलाकर खाए ऐसा करने सेकई प्रकार के प्रदर जैसे सफेद लाल और नीला जड से दूर हो जाते है।

भेद: सोम रोग और प्रदर रोग में अंतर यह है कि सोम रोग में अधिक और तेजी से पेशाब आने के कारण रज निकल जाती है और कमजोरी आने लगती है। यह बिल्कुल पतली धातु वाले का सा रोग बन जाती है। किंतु प्रदर में योनि से सफेद, काला-नीला किसी भी तरह का पानी बहता ही रहता है। इसका मतलब यही है कि रज अशुद्ध है और बच्चे दानी खराब होने लगी है इससे स्त्री में निर्बल्ता तो आती ही है साथ ही यही महारोग बन जाता है और महिला के अच्छे से अच्छे तन्दुरुस्त शरीर में घुन लग जाता है इस बीमारी या सोमरस के आरम्भ होते ही शीघ्र इलाज करा लेनी चाहिए अन्यथा ये दोनों रोग ऐसे भयंकर रोग बन जाते है कि फिर या तो स्त्री नही या रोग ही नही अर्थात य दोनों बीमारियों प्राण लेकर ही उसका पीछा छोडती है।

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