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स्त्री योनि रोग दूर करें

गिलोय करेली, देवदारु, मालती रासना, खरेटी, चीता, मुलहटी, चमेली जड 1-1 तोले सबको कूटकर आठ गुने पानी में रात को भिंगो दे, सुबह चटनी जैसी पीसकर एक पाव तेल में मिलाकर कढाई में डालकर धीमी आग से पकाओं, जब सब जल जाय और तेल बचे उतारकर छानो, इसका रुई में तर फागा इक्कीस दिन तक योनि में रखे, इससे योनि के समस्त रोग दूर हो जाते है।

 

पारम्परिक भारतीय वज़न इस प्रकार हैं -
४ धान की एक रत्ती बनती है, ८ रत्ती का एक माशा बनता है, १२ माशों का एक तोला बनता है, ५ तोलों की एक छटाक बनती है, १६ छटाक का एक सेर बनता है, ५ सेर की एक पनसेरी बनती है, ८ पनसेरियों का एक मन बनता है, या पुराने भारतीय नाप-तौल :- 8 खसखस = 1 चावल, 
8 चावल = 1 रत्ती, 8 रत्ती = 1 माशा, 4 माशा =1 टंक, 12 माशा = 1 तोला, 5 तोला = 1 छटांक, 4 छटांक = 20 तोला या 1 पाव, 8 छटांक या 40 तोला = 1 अधसेरा, 16 छटांक या 80 तोला = 1 सेर, 5 सेर = 1 पसेरी, 8 पसेरी = 40 सेर या 1 मन, 1 केजी = 86 तोला या 1 सेर 6/5 छटांक, 100 केजी = 1 क्विंटल या 2 मन 27 5/2 सेर।
 

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