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फैशन की सनक

Feed by sandy Cat- Essay

फैशन का तात्पर्य बदलते हुए सामाजिक परिदृश्य तथा रीति-रिवाजों के अनुरुप अपने जीवन व रह्न-सहन के तरीके को उसके अनुरु परिवर्तित करने से है। फैशन, पोशाक, जेवरों, बालों की बनावट, ख्अने-पीने के तरीकों, मनोरंजन के साधनों तथा शिष्टाचार में होता है। फैशन हवा की दिशा की तरह परिवर्तित होता है, जिसके साथ गति बनाए रखना मनुष्य को कठिन होता है। फैशन पुरुषों तथा स्त्रियों दोनों में ही पाया जाता है। लडकों तथा लडकियों में फैशन की सनक कुछ अधिक होती है। वे टी. वी. कार्यक्रम, फिल्में इत्यादि देखते है और उनके चरित्रों की भांति ही पोशाकें पहनने, बोलने तथा चलने –फिरने की नकल करते है।

वे नवीनतम डिजाइनों तथा फैशन की पोशाकें पसन्द करते हैं। लडकियां नए फैशनों में स्वच्छन्द रुप से तितिअलियों भांति चलती-फिरती है। लडके भी चलने-फिरने, बोलने, बालों की बनावट व पोशाकों में फिल्मी कलाकारों की नकल करते है। लडकों के बालों की बनावट लड्कियों की तरह होती है जबकि लड्कियां लडकों की तरह बाल कटवाती है। तथा वह पोशाकें भी लडकों की तरह पहनने की कोशिश करती है।

लडके तथा लडकियों ने क्रिकेट मैचों तथा मिल्मों इत्यादि के बारे में बात करने को फैशन बना दिया है। तीव्र गति से दुपहिया वाहन चलाने को भी वह फैशन समझते हैं। अपने माता-पिता का सम्मान भारतीयों की तरह करने के स्थान पर उनसे इंग्ल्श् स्ताइल में बात करने को फैशन समझते हैं। वे अप्ने बुजुर्गों से आगे चलने को भी फैशन समझते हैं। फैशन के बदलने से कोई हानि नही है, परंतु प्रत्येक वस्तु की अधिकता हानिकारक होती है। फैशन की सनक अधिक समय तक नही चलती।

लोग सोचते हैं कि फैशन अच्छे स्वाद को इंगित करता है परंतु फैशन स्थायी नहीं होता। आधुनिक फैशन के साथ चलना अत्यधिक कठिन हो गया है। कभी बैगी पैंट पहनने का फैशन है। अब बेलबोटम का फैशन आएगा।

फैशन में परिवर्तन मनुष्य के अनोखी बीजों के पति प्रेम का परिणाम है। प्रत्येक मनुष्य में नायक की तरह दिखने की इच्छा होती है। अधिकतर फैशन फिल्मों के परिणाम होते हैं। यह एक उचित कदम नही हैं कि मनुषय फैशन का दास हो जाए। उसे आंख मून्द कर फैशन का अनुसरण नहीं करना चाहिए। वह मनुष्य जो फैशन का दास नहीं बनता और अपनी वास्तविकता बनाए रखता है, एक साधारण मंष्य से ऊपर कहलाता है।

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