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मदर टेरेसा

Feed by sandy Cat- Essay

दया की देवी मदर टेरेसा का जन्म यूगोस्लाविया के स्कॉल्पजी में 27 अगस्त, 1910 को हुआ था। इनके माता-पिता अल्बेनियन थे। अत: इनका नाम अगंस था। मदर टेरेसा दया, सेवा तथा प्यार की पहचान है। मदर टेरेसा ने गरीबों तथा बीमारों की सेवा में ही अपना सारा जीवन लगा दिया। यह 18 वर्ष की उम्र में भारत आई तथा इन्होने सारा जीवन गरीबों, अनाथों, बीमारों की सेवा करने में लगा दिया।

बढती उम्र में शरीर कमजोर होने पर भी इन्होंने लोगों की सेवा करनी नही छोडी तथा यह हमेशा की तरह कडे मेहनत करती रहीं क्योंकि मदर टेरेसा की आत्मा बहुत शक्तिशाली थी। मदर टेरेसा एक महान व्यक्तित्त्व की स्वामिनी थी। यह 12 वर्ष की उम्र में ही नन बन गई थीं। यह कलकत्ता में एक अध्यापिका के रुप में कार्यरत थी। इनकी सेवा तथा दया के कार्यों में बहुत सी मिशनरियां मदद करती हैं। सारी दुनियां के सभी गरीब, बीमार बच्चों के लिए यही एक घर है, जहॉ उनकी सेवा बिना किसी लालच के की जाती है। अपने कार्यों के लिए इन्हें 1979 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया, तथा मानवता की सेवा के लिए इन्हें 1980 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया। अपने कार्यों के लिए मदर टेरेसा को कई अन्य एवार्ड दिए गए। यह 1962 में भारत की नागरिक बनी तथा यह पहली भारतीय महिला थी जिन्हे6 नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

यह एक महान नारी, सच्ची मॉ तथा सही मायनों में देवी थी। इन के कार्य और समर्पण की तुलना नहीं की जा सकती। इनका व्यक्तित्व फ्लोरेंस नाइटेंगल की याद दिलाता है इन्हे “लैडी विद द लैम्प” कहा जाता है। मदर टेरेसा का जीवन उन लोगों के लिए एक उदाहरण है जो मानवता की सेवा करना चाहते हैं। इनकी दया और त्याग हमें महात्मा बुद्ध की याद दिलाता है।

इन्होनें गरीबों, बीमार तथा जरुरतमर्दों के लिए बहुत से घरों का निर्मान करवाया। हमें मदर टेरेसा पर गर्व है। हमारे देश को ही नही वरन पूरे संसार को मदर टेरेसा पर गर्व है। दुनिया भर में मदर टेरेसा को दया की देवी कहा जाता है।

मदर टेरेसा ने बहुत से देशों की यात्रा की। यह जहॉ भी गई उन्हें प्यार तथा सम्मान मिला। इनकी तुलना दुनिया में किसी से नहीं की जा सकती। मदर टेरेसा की मृत्यु 5 सितम्बर, 1997 को कलकत्ता में हुई।

Fastread.in Author Manisha Dubey JhaDear Reader, My name is Manisha Dubey Jha. I have been blogging for 3 years and through the Fast Read.in I have been giving important educational content as far as possible to the reader. Hope you like everyone, please share your classmate too. As a literature person, I am very passionate about reading and participating in my thoughts on paper. So what is better than adopting writing as a profession? With over three years of experience in the given area, I am making an online reputation for my clients. If any mistakes or wrong in the article, please suggest us @ fastread.ait@gmail.com

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