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भारत : एक परमाणु शक्ति के रुप में

Feed by sandy Cat- Essay

परमाणु शक्ति के रुप में भारत ने बहुत अच्छी बृद्धि की है। आज भारत के परमाणु बैज्ञानिक संसर के किसी भी देश के विशेषज्ञों या तकनीशियनों से मुकाबला कर सकते हैं। किंतु भारत सरकार परमाणु शक्ति का उपयोग शांतिपूर्ण तथा विकासोपयोगी साधनों के विकास में करने के लिए समर्पित और वचनवद्ध है। भारत सरकार की कोई मंशा नही है कि वह परमाणु बनाए, जो मानवता का विनाश मे उपयोग होता हो। भारत सरका ने केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए ही परमाणु शक्ति का उपयोग किया है।

संसार में केवल कुछ ही देशों के पास परमाणु शक्ति से सम्बन्धित जानकारी है। ये देश संयुक्त राज्य अमेरिका, इंगलैण्द, फ्रांस, च्ईन तथा रुस है। इन देशों का समूह “न्य्क्लियर क्लब” कहलाता है। भारत 18 मई, 1974 को पोख्अरण में परमाणु परीक्षण कर के इस न्यूक्लियर क्लब में शामिल हो गया। पोखरण, राजस्थान के रेगिस्तान के समीप है। यह एक भूमिगत विस्फोट था। क्योंकि यह विस्फोट पृथ्वी के अन्दर किया गया था। अत: इसके कारण किसी प्रकार का रेडियोएक्टिव विकिरण नहीं हुआ। यह विस्फोट पन्द्रह किलोटन की शक्ति का था। इसके उपरांत भारत ने सन 1998 में 11 व 13 मई को भी राजस्थान के पोखरण में ही परमाणु परीक्षण किए। इन परीक्षणों के फलस्वरुप भारत को अंतर्राष्ट्रीय निन्दा व प्रतिबंधों का सामना करना पडा।

किंतु पोखरण के परमाणु विस्फोटों ने भारत को परमाणु युग में स्थापित कर दिया। यह भारत के वैज्ञानिकों की एक बडी उपलब्धि थी। इसके पश्चात भारतीय वैज्ञानिक इस तकनीक से और अधिक विकास में जुट गए। भारत ने सदैव ही यह इच्छा व्यक्त की है कि परमाणु शक्ति का उपयोग मानवता की भलाई व लाभकारी कार्यों के लिए होना चाहिए, न कि मानवता के विनाश के लिए। भारत ने सन 1971 में ही यह कह दिया था कि वह परमाणु परीक्षण करेगा किंतु यह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए होंगे। उस समय भारत के रक्षामंत्री श्री बाबू जगजीवन राम ने कह दिया था कि भारत के वैज्ञानिक शांतिपूर्ण उद्देश्यों की पूर्ति के लिए भूमिगत परमाणु परीक्षणों की सहायता से परमाणु ऊर्जा का अध्यन कर रहे थे। किंतु अन्य देशों के वैज्ञानिकों ने सोचा कि भारत ऐसा नहीं कर सकता। उन्होंने इस घोषणा को साधारण रुप से लिया और भारत ने परमाणु परीक्षण करके इस युग में प्रवेश किया।

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