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पौढ शिक्षा

Feed by sandy Cat- Essay

भारत में चलाऐ जा रहे समाज कल्याण के कार्यक्रमों में सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम पौढ शिक्षा का कार्यक्रम है। हमारे देश में लगभग पचास प्रतिशत प्रौढ (स्त्र- पुरुष) निरक्षर हैं। इन स्त्री-पुरुषों को जितना शीघ्र हो सके साक्षर बनाना आवश्यक है. अन्यथा भारत में लोकतंत्र ठीक प्रकार से कार्य नही कर पाएगा क्योंकि ये अपने वोट का अर्थ भी नही समझते हैं। हमारे देश में अधिकतर लोग शिक्षा का खर्च वहन नहीं कर सकते हैं। वे दिन भर मजदूरी करके अपनी रोजी-रोटी के लायक ही जुटा पाते हैं। अत: यह रात के समय चलने वाली कक्षाओं में प्रौढ शिक्षा प्राप्त करते हैं। यह कक्षाएं सामाजिक कल्याण सस्थाओं द्वारा भारत के अनेक भागों में आयोजित की जाती है।

ऐसा देश जिसमें अधिकतर सनस्ंख्या निरक्षर होती है, विकास नहीं कर सकता। भारत में लगभग पचास करोड लोग निरक्षर है। 2 अक्टूबर, 1978 को महात्मा गांधी के जन्म दिवस के अवसर पर राष्ट्रभर में राष्ट्रीय शिक्षा कार्यक्रम आरम्भ किए गए। इन्दिरा गान्धी की सरकार ने एन कार्यक्रम को जारी रखा। प्रौढ शिक्षा एक अराजनीतिक तथा अविवादित विषय है। प्रधानमंत्री इन्दिरा गान्धी, प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई की अपेक्षा प्रौढ शिक्षा कार्यक्रम  में अधिक रुचि लेती थीं। मोरारजी देसाई ने सन 1978 में इस कार्यक्रम का आरम्भ किया। भार में 460 जिलों में प्रौढ शिक्षा केन्द्र खोले गए।

प्रौढ शिक्षा योजना के अंतर्गत, अशिक्षित या निरक्षर लोगों को पढाने के साथ-साथ जीविका कमाने के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाता है। इन कार्यक्रमों में पढाई के घण्टे उस समय रखे जाते थे जिस समय वे काम के घंटो से  न टकरायें। सन 1978 में आरम्भ किए गए इन कार्यक्रमों से पांच वर्षों में केवल एक प्रतिशत लोगों को ही साक्षर बनाया जा सका। अत: यह एक दूरगामी स्वप्न के लिए दौडने के समान सिद्ध हुआ। हमारे देश की सनसंख्या लगातार बढ रही है, अत: साधनों के अभाव में निरक्षता भी बढ रही है। अत: वर्तमान में आजादी के समय से अधिक लोग निरक्षर हैं।

प्रौढ शिक्षा के द्वारा फैक्ट्रियों व कार्यालयों के लिए अच्छे कर्मचारी मिल जाते हैं। अत: वे इसकी सहायता से अपने शिक्षण का खर्च वहन कर सकते हैं। यह कार्यक्रम भारत को अच्छे नागरिक देता है। इस कार्यक्रम के द्वारा लोगों में जागृति तथा देश की राजनीति के प्रति एक चेतना का विकास होता है। प्रौढ शिक्षा देश के बहुमुखी विकास मे सहायक होती है। इसके द्वारा लोगों के जीवन-स्तर में वृद्दि की जा सकती है।

सरकार को चाहिए कि वह प्रौढ शिक्षा कार्यक्रमों का प्रबन्धन ऐसे हाथों में सौंपे, जिससे कि लोगों तक वास्तव में इसका लाभ पहुंच सके। अर्थात इन कार्यक्रमों का संचालन लालची लोगों के हाथों में नही होना चाहिए। अत: हम आशा करते हैं कि सरकार इस दिशा में उचित कदम उठाएगी।

सरकार को प्रौढ शिक्षा कार्यक्रमों का लाभ लोगों तक पहुंचाने के लिए सामाजिक संस्थाओं को उचित सहायता प्रदान करनी चाहिए। ताकि वे इस कार्य में रुचि लें और लोगों को पढने और लिखने लायक साक्षर बना सकें।

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