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एक चुनाव बूथ का दृश्य

Feed by sandy Cat- Essay

जनतंत्र में, जनता की, जनता के लिए तथा जनता के द्वारा चुनी गई सरकार होती है। समस्त राजनैतिक शक्ति जनता के हाथों में रहती है, जो भारत में लोकसभा के नए सदस्यों के चुनाव के लिए पांच वर्ष मेय़ एक बार मिलते हैं। जो केन्द्रीय मंत्रिमण्डल का गठन करते हैं तथा सरकार चलाते हैं। सबसे बडी पार्टी प्रधानमंत्री का चुनाव करती है जो संघीय मंत्रिमण्डल का गठन करता है।

लोकसभा के सदस्यों के चुनाव के लिए लोग मतदान केन्द्रों पर जाते हैं, जहां वे अपना वोट डालते हैं। केवल स्वस्थ मस्तिष्क वाले स्त्री-पुरुष तथा 18 वर्ष या उससे ऊपर की आयु के लोग अपना वोट डालने के योग्य होते हैं। विभिन्न राजनैतिक पार्टियां अपने उम्मीदवार खडे करती है। इनके अतिरिक्त स्वतंत्र उम्मीदवार भी मैदान में होते हैं। लोगों को उम्मीदवारों में से अपनी पसन्द का चुनाव करना होता है। जो उम्मीदवार सबसे अधिक वोट पाता है, वह विजयी होता है।

इसी प्रकार, राज्य विद्दानसभाओं, नगर समितियों तथा यहां तक कि ग्राम पंचायत के लिए भी चुनाव होते हैं। सभी दशाओं में चुनाव की प्रक्रिया समान होती है।

मतदान केन्द्र बनाए जाते हैं जहां लोग जाते हैं तथा अपना वोट डालते हैं। लोग केवल उन्हीं क्षेत्रों में डाल सकते हैं, जहां से वे सम्बन्धित होते हैं तथा जहां उनके नाम मतदाता के रुप में पंजीकृत होते हैं। जो लोग वोट डालने योग्य होते हैं, वे पंक्तियों में खडे होते हैं तथा मतदान अधिकारी रजिस्टर में उनके नामों की जांच करता है। तब प्रत्येक मतदाता को एक पर्ची दी जाती है। पर्ची पर वह उस उम्मीदवार के नाम पर मोहर लगाता है। जिसे वह चुनना चाहता है। अब तो इलेक्ट्रानिक वोटींग मशीन का प्रयोग वोट डालने में किया जाता है जिसमें हर उम्मीदवार का नाम और चुनाव चिन्ह के आगे एक बट्टन होते है जिसको हर व्यक्ति अपने मतानुसार बट्टन दवाते हैं जिससे उस उम्मीदवार को वोट मिलता है इसके बाद हो दुसरा बट्टन नही दवा सकते अगर दवाते भी हैं तो वो कार्य नही करता है। हर व्यक्ति के अंगुली पर अमिट स्याही से चिन्ह लगा दिया जाता है, जिससे कि वह फिर से वोट नही डाल सके।

अपने हाथ में मतदान पर्ची लिए वह तम्बू में जाता हैं जहां वह बिलकुल अकेला होता है तथा पर्ची को सील बन्द किए एक बक्से में डाल देता है ताकि कोई उससे छेडछाड न कर सके। अपनी कागज की पर्ची को बक्से में डालने के पश्चात वह बाहर आ जाता है, तथा उसका कार्य पूरा हो जाता है।

अगले पांच वर्ष तक वह कुछ नही कर सकता है, अपितु साधारणत: अपने हाथ बांध कर अप्ने द्वारा चुने गए प्रतिनिधि द्वारा राजनीति की सर्कस में किए जाने वाले प्रदर्शन को देखता है।

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