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बेरोजगारी की समस्या

Feed by sandy Cat- Essay

आज हमारे देश में युवाओं के समक्ष सबसे बडी समस्या बेरोजगारी की है। यह समस्या दिन-प्रतिदिन बढ रही है। जब युवा स्कूल व कॉलेजों से अपनी शिक्षा समाप्त करके बाहर आते हैं तो उनकी समस्या होती है कि वे अब क्या करें? शैक्षिक संस्थाओं से प्रतिवर्श आने वाले लाखों शिक्षित युवाओं के लिए कोई रोजगार नहीं है।

आज हमारे देश के नेताओं, शिक्षाविदों व उद्योगपतियों के समक्ष सबसे बडी चुनौती बेरोजगारी की है क्योंकि, सभी शिक्षित युवक-युवतियों को सरकारी नौकरी देना सम्भव नहीं है, जबकि सभी सरकारी नौकरी चाहते हैं। अधिकतर युवाओं को कार्यालयों, फर्मो तथा फैक्ट्रियों में रोजगार दिया जाता है। वास्तव में कार्यालयों में क्लर्कों, टाइपिस्टों तथा अकाउण्टेण्टों की नौकरियां महिलाओं को मिल जाती है। अत: आदमी फार्मो तथा फैक्ट्रियों में ही कार्य करते हैं।

कार्यालय की नौकरी, श्वेत कॉलर की नौकरी कहलाती है क्योंकि कार्यालय सहायक या क्लर्क को अपने कपडे साफ-सुथरे रखने पडते हैं। फैक्ट्री की नौकरी, ब्राउन कॉलर को नौकरी कहलाती है, कोई भी श्वेत वस्त्रों के साथ मशीनों पर कार्य नहीं कर सकता है। यूरोप और अमेरिका में श्वेत कॉलर वाली नौकरियां महिलाओं के लिए व ब्राउन कॉलर वाली नौकरियां पुरुषों के लिए आरक्षित हैं। ऐसी ही कुछ सवधारणा भारत में भी बन रही है। अगले बीस वर्षों में पुरुष केवल फर्मो तथा फैक्ट्रियों में ही कार्य करेंगे तथा पूरा कार्यालय का मैदान महिलाओं के लिए साफ होगा जहां वे टाइपिस्ट, इत्यादि किस्म की नौकरियां करेंगी।

सरकार अधिक-से-अधिक युवाओं को रोजगार प्रदान करने की कोशिश कर रही है। आजकल सभी कारखानों व फैक्ट्रियों में उत्पादन क्षमता बढाने के लिए व उत्पाद की गुनवता में बढोतरी के उद्देश्य से स्वचालित मशीनें लगा दी गई है। अत: इन मशीनों को चलाने के लिए कम-से-कम लोगों की आवश्यकता होती है और बेरोजगारी में बढोतरी होती है। आज भारत के एम्प्लॉयमेण्ट एक्सचेंजों में करोडों लोगों ने अपना पंजीकरण करा रखा है किंतु देश में उन्हें देने के लिए काम नहीं है।

बेरोजगारी की समस्या को हल करने के उद्देश्य से सरकार छोटे-पैमाने के उद्योगों, कुटीर उद्योगों तथा सूक्ष्म उद्योगों को बढावा दे रही है क्योंकि ये उद्योग बडे पैमाने के उद्योगों की अपेक्षा अधिक लोगों को रोजगार दे सकते हैं तथा राष्ट्र की आवश्यकताओं की पूर्ति के पश्चात निर्यात के उद्देश्यों के लिए भी उत्पादन कर सकते हैं। गांधी जी ने ग्रामीण उद्योगों जैसे हैण्डलूम, हाथ से बने वस्त्र, चीनी मिट्टी के बर्तन तथा लकडी का कार्य व अन्य रोजगारों के विकास का सुझाव दिया था। भारत सरकार भी इसी प्रकार की योजना पर विचार कर रही है।

भारत सरकार ने बेरोजगारी की समस्या को दूर करने के लिए स्वरोजगार की योजना बनाई। इससे रोजगार भी उत्पन्न होएत हैं। बैंकों की निर्देश दिए गए कि वे युवाओं की छोटे उद्योग लगाने के लिए ऋण उपलब्ध कराएं।

राजे सरकारों ने ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं को रोजगार प्रदान करने के लिए काम के बदले अनाज कार्यक्रम का आरम्भ किया। ऐसे युवकों को जिनके पास रोजगार नहीं था, उन्हें सडक बनाने के कार्यों में तथा अन्य राष्ट्रीय उद्योगों में अपना व अप्ने परिवार का पालन-पोषण कर सकें।

कुछ राज्यों में बेरोजगारी पेंशन का आरम्भ किया गया। तथा उन बेरोजगार युवाओं को पेंशन दी गई जिनके नाम एम्प्लॉयमेण्ट एक्सचेंजो6 में तीन वर्ष से भी अधिक अवधि से पंजीकृत थे। यह छोटा-सा भत्ता केवल स्नातकों के लिए ही सीमित था।

अत: भारत सरकार बेरोजगारी की समस्या को दूर करने के अनेक उपाय कर रही है। किंतु बढती हुई जनसंख्या इस समस्या को और अधिक बढा देती है। अत: यह समस्या प्रायोगिक रुप से हल नहीं हो सकती है। केवल स्वरोजगार के द्वारा ही लाखों को भोजन प्रदान किया जा सकता है।

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