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भारत में धर्म निरपेक्षता

Feed by sandy Cat- Essay

भारत एक धर्म निरपेक्ष राष्ट्र है। धर्म निरपेक्षता का अर्थ है, कि सभी नागरिकों को पूर्ण धार्मिक स्वतंत्रता होती है। सरकार किसी नागरिक को कोई विशेष धर्म ग्रहण करने के लिए विवश नहीं कर सकती है। धार्मिक स्वतंत्रता हमारा मौलिक अधिकार है तथा संविधान में भी ऐसा लिखा गया है। प्रत्येक नागरिक को किसी भी धर्म के प्रदर्शन, किसी भी धर्म को ग्रहण करने या कोई भी धार्मिक इमारत बनवाने की स्वतंत्रता है। सरकार द्वारा सभी धर्मों को समान अधिकार प्राप्त है। स्कूलों की पुस्तकों में कोई विशेष धर्म नहीं पढाया जाता है। भारत विभिन्न धर्मो वाला देश है। अत: धर्म निरपेक्षता ही केवल ऐसा आधार है जिस पर विभिन्न सस्कृतियां रह सकती हैं व शांतिपूर्वक विकसित हो सकती है।

प्रत्येक नागरिक अपने धार्मिक मामलों में स्वतंत्र है। सभी धर्मो के साथ समान व्यवहार किया जाता है। यही कारण है कि यहां विभिन्न धर्मो के मध्य सद्भभावनापूर्ण व प्रेम का वातावरण है। सरकारी नौकरियों में किसी धर्म को कोई विशेष दर्जा प्राप्त नहीं है। भारत में अल्पसंख्यक समुदाय को अधिक स्वतंत्रता प्राप्त है। कुछ अवांछित तत्व उत्पन्न हो गए है। राष्ट्र और नाम पर विकसित हो रहे हैं। यह अवांछित तत्व हमारे आम जीवन को प्रभावित कर रहे हैं। इनकी जांच करनी चाहिए।

प्रत्येक धर्म में इस प्रकार के तत्व अन्य धर्मो से सम्बंध रखने वाले लोगों को महान हानि पहुंचा सकते हैं। निरक्षर व कम पढे-लिखे लोग इन तत्वों के शिकार बन जाते हैं। कभी-कभी ये तत्व धार्मिक उन्माद व लोगों की भावनाओं को भडकाने के लिए धर्म को एक यंत्र की तरह प्रयोग करते हैं। वे अपने स्वार्थ के लिए लोगों के मन में विष भर देते हैं। दंगे इन्हीं गलत धारणाओं का परिणाम होते हैं। नागरिकों को इस प्रकार के तत्वों से गुम्राह नहीं होना चाहिए तथा अन्य धर्मों का सम्मान करना चाहिए।

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