Print Document or Download PDF

बदलता हुआ फैशन

Feed by sandy Cat- Essay

परिवर्तन प्रकृति का नियम है। ग्रीष्मकाल शरद ऋतु में, शरद ऋतु जाडे में तथा जडा अंतत: बसंत ऋतु में परिवर्तित होता है। पश्चिम के यात्री, पूर्व के सैलानियों में मिश्रीत होते हैं। और अपने अनुभव और कभी-कभी पहनावे व रहन-सहन के तरीकों का भी आदान-प्रदान करते हैं। आप विश्व के इन परिवर्तनों को टेलीविजन तथा सिनेमा के माध्यम से देख सकते हैं। यह सब मानव को कुछ अलग सा दिखने व विभिन्न प्रकारों में रहने के लिए प्रेरित करते हैं। जब कोई भारतीय, चरवाहों के साहसी कारनामों की फिल्म देखता है तो उसके मन में जींस पहनने की इच्छा उत्पन्न होती है। इसी प्रकार जब कोई अमेरिकन नीग्रो किसी भारतीय उस्ताद को सितार बजाते हुए देखता है तो उसके मन में कुर्ता-पाजामा पहनने की इच्छा उत्पन्न होती है।

पोशाकों के कुछ प्रकार ऐसे होते हैं जो सदैव फैशन में रहते हैं क्योंकि वे आरामदायक होते हैं व उनमें पहनने वाला आराम का अनुभव करता है। उदाहरणार्थ भारतीय साडी ने महिलाओं की पोशाकों में आने वाले सभी परिवर्तनों का सामना किया है। इसी प्रकार सलवार-कमीज ने भी सामना किया जाता है। किंतु इनके अतिरिक्त अर्थात कान की बाली से लेकर जूते तक सभी में प्रतिवर्ष परिवर्तन हुए हैं।

फैशन में परिवर्तन का प्रमुख कारण पुरुषों व महिलाओं में अन्य लोगों से कुछ अलग दिखने की इच्छा होती है। नया इत्र डालने व नए डिजाइन का सूट पहनने से आपका अहंभाव बढ जाता है। उसके उपरांत जब अन्य लोग आपकी नकल करते हैं तो आपको अच्छा महसूस होता है।

किंतु कभी आपने सोचा है कि यह आवंछित है? आप सोचिए कि इसके कारण आपकी या आपके परिवार की आय पर कितना भार पडता है। आप सोचिए कि आपने जिस डिजाइन का महंगा सूट पिछले वर्ष पहना था उसे आप इस वर्ष इसलिए नहीं पहन सकते क्योंकि फैशन बदल गया है।

इस अनुभव से आप पायेंगे कि कुछ ऐसे पोशाकों के कुछ ऐसे निश्चित प्रकार होते हैं, जिनमें या तो कोई परिवर्तन नहीं होता या थोडा बहुत ही परिवर्तन होता है। उदाहरणार्थ, यदि आप अप्ने पहने हुए कपडों में आराम का अनुभव करते हैं तो आप उन्हें पहनना जारी रखें। आप उसके बतन या फीते कभी-कभी परिवर्तित कर सकते हैं। कभी यह नहीं भूलना चाहिए कि आज जो कुछ पुराना हो गय है वह आने वाले समय में पुन: फैशन में आएगा।

 

Read More.


Go Back