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बढते हुए मूल्यों की समस्या

Feed by Kumar Sanu Cat- Essay

आज भारत में सबसे बढी आर्थिक समस्या बढते हुए मूल्यों की समस्या है। यह समस्या पर्तिदिन लाखों लोगों के गले पर वार कर रही है। क्योंकि लाखों लोग दिन में एक वक्त का भोजन कठिनता से कमा पाते हैं। भारत में लाखों लोग रात को भूखे सोते हैं। और प्रात: काल अपने दिन भारत के कार्य अकरने के लिए भूखे उठते हैं। किंतु उनका दिनभर का कार्य उन्हें समुचित पैसा प्रदान नहीं कर पाता कि वे उचित प्रकार से ख-पी सकें।

पिछले पांच वर्षों में मूल्य दोगुने हो गए हैं। तथा अनेक आम वस्तुयें सादहरण लोगों की पहुंच से दूर हो गई है। यहा तक की दालें भी केवल धनी लोगों की पहुंच तक सीमित हो गई है। जब्कि मांस बहुत उच्च मूल्य पर बेचा जता है। अधिकाधिक वस्तुयें साधारण व्यक्ति की पहुंच से दूर हो गई हैं।

इसके कारण बहुत दूर नहीं है क्योंकि लोगों में शीग्र अतिशीग्र धनी बनने की सनक है। उद्दोग्पति, उत्पादक तथा दलाल केवल अपना उच्च लाभ देखते हैं। उनमें गरीब उपभोक्ता तथा खरीददार के लिए कोई दया नहीं होती। बडे उद्योग आर्थिक साम्राज्य की रतह हो गए हैं। वे साधारण लोगों से अपनी शर्तों पर व्यवहार करते है। भारत में लगभग बीस परिवारों जैसे-टाटा, बिडला इत्यादि ने देश को फिरौती पर रखा है। उनके पास टनों काला धन है और वे समान सत्ता चलाते हैं। स्मगलर, उद्दोगप्ति तथा कालाबाजारी करने वाले हमारी जमीन के वास्तविक स्वामी बन गए हैं। उन्होंने पुलिस तथा जजों को अपना दास बना रखा है।

सरकार के निर्णय भी त्रुटिपूर्ण है। सरकार करों में वृद्धि करती है, जिसके फलस्वरुप मूल्य बहुत उच्च हो जाते हैं। वह न्यूनवित पत टिकी है तथा इस कारण वे टॅनों मुद्रा के नोट मुद्रित करती है। इससे मूल्य बढते हैं तथा आम आदमी अपनी आवश्यकताओं के लिए नाक के बल मूल्य चुकते हैं।

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