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अनुशासन

Feed by Kumar Sanu Cat- Essay

अनुशासन से तात्यपर्य है- नियमों में बन्धकर कार्य करना। अनुशासन का मानव जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है। बिना अनुशासन के कोई भी संस्था भली प्रकार से नहीं चल सकती है। सभी मनमानी करने लगते हैं। कोई भी कार्य समय पर नहीं हो पाता। अनुशासन से जीवन में शालीनता तथा नियमितता आ जाती है। हमारे देश में अनुशासन का अभाव दृष्टिगोचर होता है और यही कारण है कि हम अपेक्षित गति से प्रगति नहीं कर पा रहे हैं। अनुशासनबद्ध राष्ट्र ही प्रगति की राह पर तीव्र गति से बढते हैं। चाहे परिवार हो या देश, अनुशासन की हर स्थान पर आवश्यकता होती है। यह हमारे जीवन को सुविधाजनक बनाता है।

विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का विशेष महत्व हैं। सोनो का आपस में गहरा सबन्ध है। बिना अनुशासन के विद्यार्थी विद्या ग्रहण नहीं कर सकता। अनुशासनहीनता दुराचार की पहली सीढी है। यदि छात्र कक्षा में अनुशासनहीनता का प्रदर्शन करने लगेंगे तो अध्यापक के लिए पढाना कठिन हो जाएगा। विध्यालन में शांत वातावरण बनाए रखना, गुरुजनों की बात को ध्यान से सुनना, विद्यालय के नियमों का पालन करना विद्यार्थी के लिए आवश्यक है।

इस प्रकार फैक्ट्री तथा ऑफिसों में यदि कर्मचारी तथा आफिसर सही प्रकार से कार्य नहीं करेंगे तो हमारा देश कभी तरक्की नहीं कर सकता। प्रत्येक ऑफिस तथा फैक्ट्री के अपने अनुशासन तथा नियम होतें हैं, जिनका पालन करना कर्मचारियों का कर्तव्य है।

परंतु वर्तमान समय में सवर्त्र अनुशासनहीनता दृऍष्टिगोचर होती है। शिक्षन संस्थाएं अपनी पवित्रता खोती जा रही है। देश की अन्य समस्याओं के साथ-साथ छात्रवर्ग की अनुशासनहीनता भी एक विकट समस्या बनती जा रही है। दिन-प्रतिदिन की हडतालें, स्कूल कॉलेज के फर्नीचर को नष्ट करना, बसों को जलाना तथा ऑफिस तथा कम्पनियों में यूनियन आदि सभी अनुशासनहीनता के प्रतीक हैं।

छात्रों तथा कर्मचारियों को अपने कार्य तथा उद्देश्य को ध्यान में रखन चाहिए तथा सदैव अनुशासन में रहना चाहिए तथा देश की प्रगति में मदद करनी चाहिए।  

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