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हडताल

Feed by Kumar Sanu Cat- Essay

देश में प्राय: छोटे-छोटे मुद्दों पर हडताल होती रहती है। यह सही है कि अन्याय का पर्तिकार करने के लिए हडताल एक कारगर उपाय है। मजदूर अपने मालिक तक अपनी मांग इसी माध्यम से पहुंचाता है। राष्ट्रहित की दृष्टि से हडताल पर विचार करना आवश्यक हो गया है।

हडताल होने से राष्ट्र के विकास में निश्चय ही बाधा पहुंचती है। एक दिन के काम ठप्प होने मात्र से करोडो रुपयों का उत्पादन नहीं हो पता। इससे हमारा विकास और पीछे की ओर खिसक जाता है। उत्पादन कम होने की स्थिति में जहां मिल-मालिक प्रभवित होटल हैं, वहीं श्रमिक भी अप्रत्यक्ष रुप से अवश्य प्रभावित होटल हैं। बैंकों के हडताल से कारोबार को कितना धक्का पहुंचाता है, इसका महज अनुमान लगाना तक कठिन है। भारत एक विकासशील देश है। इसे अभी आर्थिक दृष्टि से बहुत विकास करना है। ऐसी स्थिति में हडताल करने को किसी भी प्रकार से उचित नहीं ठहराया जा सकता। जब राष्ट्र का विकास रुक जाता है तो अंतत: हमारा ही विकास रुकता है।

अब प्रश्न उठता है कि मजदूर, हडताल के अलावा किस प्रकार अपनी बात कहें? हडताल तो एक माध्यम है अपने आप में कुछ नहीं। सरकर और प्रबन्धकों को ऐसे उपाय करने चहिएं कि करखानों के संचालन में श्रमिकों की भागीदारी सुनिश्चित हो। श्रमिकों की समस्याओं को गंभीरतापूर्वक सूना जाना चाहिए और शीग्र ही उनका निराकरण भी करना चाहिए। इससे हडताल करने जैसी स्थिति है उत्पन्न नहीं होगी। रेलवे तथा बसों आदि की हडताल होने पर पूरे देश का यातायात प्रभावित होता है तथा सारा कार्य लगभग ठप्प हो जाता है। राष्ट्र को विकास के पथ पर अग्रसर करने  के लिए उत्पादन का पहिया निरंतर घूमते रहना नितांत आवश्यक है।

देश की प्रगति के लिए सरकार को हडतालों पर रोक लगानी चाहिए तथा कर्मचारियों की समस्याओं को शांतिपूर्वक सुंकर जल्दी-से-जल्दी दूर करना चहिए।

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