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जीवन में खेला-कूद का महत्व

Feed by Kumar Sanu Cat- Essay

उछलते-कूदते हुए हंसमुख बालकों को जिसने देखा है, उसे पता है कि खेल क्या वस्तु है। कबद्डी, मल्लयुद्ध, क्रिकेट, हॉकी, फुटबाल, तैराकी, टेनिस आदि अनेक प्रकार के खेल हैं। खेलों से मनोरंजन के साथ-साथ व्यायाम होता है। जिसका मन कहीं पर भी एकाग्र न होगा हो उसका मन खेलों में पूरी तरह लग जाता है। मानो खेल योग-साधना का विशेष अंग हों।

खेलने वाला व्यक्ति कुछ देर के लिए संसार के सारे झंझटों से मुक्त हो जाता है, वह निश्चिंत हो जाता है, इसलिए उसके स्वास्थ्य में उन्नति होती है। उसका मन सदा प्रसन्न रहता है। उसका स्वभाव मधुर बन जता है। उसमें फुर्ती आ जाती है। इसलिए सरकारी नौकरियों में खिलाडियों को प्राथमिकता दी जाती है। कई अच्छे खिलाडी तो केवल खिलाडीपन के नाते ही नौकरियां पा जाते हैं।

कई विद्यार्थी खेल को पढाई में बाधक समझते हैं। परंतु यह उनकी भूल है। खेल से बिल्कुल विमुख रहने वाले एवं किताबी-कीडा विद्यार्थी अपने स्वास्थ्य से हाथ धो बैठते हैं। किंतु हर समय खेलों में व्यस्त रहना भी अच्छा नहीं। मगर शरीर में स्फूर्ति उत्पन्न करने के लिए तथा मस्तिष्क को ताजा रखने के लिए नियमपूर्वक खेलना बहुत आवश्यक है।

जो खेल की महत्ता को समझते हैं और नियमपूर्वक खेलते हैं, वे पुरुषार्थी होते हैं। वे दिन भारत काम करते हुए थकते नहीं। उनकी आयु भी अधिक होती है। क्योंकि वे प्रतिदिन खेल-कूदकर ताजे हो जाते हैं। यूरोप के लोग खेल्लना आवश्यक समझकर प्रतिदिन खेलते हैं। यही कारण है, कि शरीरिक स्वास्थ्य की दृष्टि से वे अपेक्षाकृत अधिक स्वस्थ और उन्नत हैं। कभी भारतवासी भी बडे माने हुए खिलाडी हुआ करते थे, पर एक समय ऐसा आय, जब वे खेलना केवल बच्चों की जरुरत समझकर स्वयं दिन-रात व्यापार-धन्धों आदि में फंस गए। इसलिए खेल के क्षेत्र में उनकी अवनति हो गई। अब वे इस दिशा में फिर से सचेत हुए हैं और खेलों में पूरा योग देने लगेगी हैं। हॉकी, क्रिकेट, कबड्डी, कुश्ती और एथलेटिक्स इनमें भारत के खिलाडी, ससार के अच्छे खिलाडी माने जाते हैं। अन्य खेलों में भी प्रगति कर रहे हैं।

खेलों का सबसे अधिक लाभ यह है कि उनसे लोगों में बांकापन, उदारता, सहनशीलता आदि गुण बढते है। ये गुण नैतिक, सामाजिक और राजनैतिक उन्नति के लिए बहुत आवश्यक है। बांके, उदार और सहनशील नेताओं से ही देश चलता है। खेलों से मनुष्य का ओछापन और संकुचित वृति नष्ट हो जाती है।

आज के वैज्ञानिक एवं भौतिक युग में शरीर को स्वस्थ रखना एक सम्स्या बन गई है। लोगों के पास समय का अभाव है। यह स्मरण रखने योग्य बात है कि धन की हानि होना उतनी खतरनाक नहीं है जितना स्वास्थ्य की हानि। यदि एक बार सेहत चौपट हो गई तो फिर उसका संभालना कठिन है। स्वास्थ्य को ठीक-ठीक रखने के लिए खेल-कूद बहुत आवश्यक है। खेल-कूद हमारे जीवन को ताजगी से भरपूर बनाए रखते हैं।  

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