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राष्ट्रपिता : महात्मा गांधी

Feed by Kumar Sanu Cat- Essay

पिता के समान सारे देशवासियों की चिंता करने के कारण महात्मा गांधी को ‘बापू’ कहा जाता है। महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर, 1869 में गुजरात के काठियावाड में पोरबन्दर नामक स्थान पर हुआ। महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास कर्मचन्द गांधी था।

गांधी जी सत्य के पुजारी थे। उन्होंने सत्य के सच्चे स्वरुप को जीवन में अपनाया। गांधी जी के व्यक्तित्व पर गीता का बडा गहरा प्रभाव था। उन्होंने समाजिक जीवन में जब सत्य को परास्त होता हुआ देखा तो उनका ह्रदय द्रवित हो उठा।

गांधी जी अहिंसा के पुजारी थे, ये शत्रु की हिंसा ही नहीं, अपने द्वारा की गई हिंसा को भी पाप समझते थे। गांधी जी ने भारत को अहिंसा के मार्ग पर चलकर अंग्रेजों से स्वतंत्रता दिलवाई। गांधी जी ने अंग्रेजों के विरुद्ध स्वदेशी आन्दोलन चलाकर उनके सारे उद्योगों पर तालाबन्दी करा दी। इसके लिए उन्होंने नया शस्त्र चरखा दिया।

गांधी जी ने गुलाम भारत को आजाद कराने के लिए असहयोग-आन्दोलन, भारत छोडो आन्दोलन आदि का प्रयोग किया तथा उनके सविनय अवज्ञा आन्दोलन के कारण ही अंग्रेजों ने 15 अगस्त, 1947 को भारत को स्वतंत्र कर दिया।

गांधी जी ने भारत में सभी जातियों को समान अधिकार दिलवाये। उन्होंने हरिजनों तथा पिछडी जातियों के उद्धार के लिए भी जी-जान लगा दिए।

दुर्भाग्य से कुछ उन्मत लोग गांधी जी के कार्यों से असहमत थे। उन्हीं में से एक पागल ने 30 जनवरी, 1948 को उनकी हत्या कर दी। परंतु गांधी जी का बलिदान व्यर्थ नहीं गया। आज के नवीन भारत में हर जगह उनके आचार-विचार की छाप देखी जा सकती है।

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