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दहेज प्रथा

Feed by Kumar Sanu Cat- Essay

प्राचीन समय में दहेज का अर्थ था। वधू-पक्ष की ओर से वर-पक्ष को दिए जाने वाले उपहार। परंतु आधुनिक समय में दहेज का अर्थ ही बदल गया है। आज के समय में दहेज वह सम्पति तथा मूल्यवान वस्तुयें है, जिन्हें वर-पक्ष विवाह तय होने से पूर्व ही कन्या पक्ष से शर्त के रुप में मांगता है। तथा इससे समाज में अनेक बुराईयां पैदा हो रही है।

दहेज के कारण समाज में जिन बुराईयों ने जन्म लिया है, उनके अनेक कारण है। जैसे-पैसे के प्रति लोगों को बढता लालच, बाल-विवाह, विवाह की अनिवार्यता तथा इनके ही कारण दहेज प्रथा का समाज में बोल बाला है।

हम जिस समाज में रहते है वहां मां-बाप अपने लडकों को पढाने के लिए अपना सब कुछ बेच सकते हैं तथा वह यह सोचते हैं कि बेटे की शादी में दहेज के रुप में सब कुछ वापस मिल जाएगा तथा वह वधू-पक्ष पर दहेज के लिए दबाव डालते हैं। इसी प्रकार विवाह को हमारे समाज में एक जरुरी कार्य माना गया है। कुरुप तथा विकलांग कन्याओं के मां-बाप जाने –अनजाने लडकों का विवाह उनसे कर तो देते हैं परंतु वे इस प्रकार से दहेज की प्रथा को बढावा देते हैं। इसी प्रकार समाज में दहेज का दानव अपना प्रभुत्व स्थापित कर रहा है।

दहेज से बचने के लिए मां-बाप अपनी कम उम्र की कन्याओं का विवाह बडी उम्र के लडकों से कर देते हैं या फिर दहेज न होने के कारन प्रताडित किए जाने के डर से कन्याएं विवाह ही नहीं करती, इस प्रकार से समाज में व्यभिचार तथा अन्य बुराईयां पनपने लगती है।

दहेज के लिए तंग किए जाने पर ज्यादातर लडकियां या तो आत्महत्या कर लेती है या ससुराल वालों के द्वारा मार दी जाती है।

दहेज के विरोध में सरकार ने 1 जुलाई, 1961 को ‘दहेज विरोधक अधिनियम’ बनाया जिसके अंतर्गत दहेज लेने वाले को 6 मास का कारावास तथा 5 हजार रुपये का जुर्माना देना होगा, परंतु यह कानून तभी कारगर साबित हो सकता है, जब समाज में रहने वाले लोग सरकार का साथ देंगे। लडकियों की पढाई तथा उच्च शिक्षा पर जोर दिया जाना चाहिए। जिससे वह अपने पैरों पर खडी हो सके तथा उच्च शिक्षा पर जोर दिया जाना चाहिए। जिससे वह अपने पैरों पर खडी हो सके तथा अपने भविष्य का फैसला स्वयं कर सकें। अंतर्जातीय विवाह को बढावा मिलना चाहिए। युवकों को स्वावलम्बी बनने में मदद करनी चाहिए। जिससे वह स्वयं अपना जीवनसाथी चुन सके तथा उन पर किसी का दबाव न हो। इस प्रकार से सरकार की मदद करके हो हम समाज में दहेज के दानव को खत्म कर सकते हैं।

दहेज एक ऐसा दानव है, जो समाज तथा हमारे देश को धीरे-धीरे नष्ट कर रहा है। इस बुराई को दूर करने के लिए युवक-युवतियों को जागरुक होना चाहिए तथा लडकियों के मां-बाप को प्रण करना चाहिए कि वह किसी भी दबाव में नहीं आयेंगे तथा दहेज का विरोध करेंगे।

इन उपायों को अपनाकर ही दहेज के दानव को समाज से दूर किया जा सकता है।

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