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हमारी राष्ट्रीय भाषा : हिन्दी

Feed by Kumar Sanu Cat- Essay

मनुष्य ने अपने भावों को व्यक्त करन के लिए भाषा का अविष्कार किया। प्रत्येक अपने भावों को, अपने विचारों को दूसरों तक पहुंचाने के लिए भाषा का प्रयोग करता है। विश्व में हर देश की अपनी एक अलग भाषा है।

किसी-भी देश में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा को उस देश की ‘राष्ट्र भाषा’ कहते हैं। किसी भी राष्ट्र में अनेक जातियों के लोग रहते हैं तथा सबकी भाषायें भी अलग होती है, परंतु देश की एकता को बनाए रखने के लिए ऐसी भाषा की आवश्यकता होती है, जिसका प्रयोग प्रत्येक नागरिक कर सके तथा राष्ट्र के सभी सरकारी कार्य उसी भाषा में किए जाते हैं।

प्रत्येक मनुष्य के मानसिक तथा बौद्धिक स्तर के विकास के लिए राष्ट्र भाषा आवश्यक है। मनुष्य चाहे कितनी ही भाषाओं का ज्ञान प्राप्त कर ले परंतु अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए उसे अपनी भाषा की शरण लेनी ही पडती है।

हिन्दी भाषा को राष्ट्र भाषा के रुप में भारतीय संविधान में स्वीकार किया गया था। भारत में हिन्दी के अतिरिक्त अन्य कई भाषायें बोली जाती हैं। परंतु राष्ट्र भाषा का गौरव हिन्दी को ही प्राप्त है। हमारे देश में समय-समय पर अनेक भाषाओं का विकास हुआ। प्राचीन काल में हमारे राष्ट्र में बोली जाने वाली भाषा संस्कृत थी, उसके पश्चात मुगलों के समय में उर्दू को प्राथमिकता दी जाने लगी तथा अंग्रेजों के समय में अंग्रेजी भाषा ने सारे राष्ट्र पर अपना प्रभुत्व स्थापित कर लिया, परंतु अंग्रेजों के जाने के पश्चात भी अंग्रेजी भाषा का अंत नहीं हुआ, इसी समस्या को देखते हुए भारतीय संविधान में हिन्दी को राष्ट्रीय भाषा का सम्मान दिया गया।

हिन्दी भाषा भारत के सबसे ज्यादा क्षेत्रों में बोली जाने वाली भाषा है। जिसे देश के लगभग 37 करोड लोग बोलते हैं, तथा यह आसानी से समझ में भी आ जाती है।

देश के संस्थान जैसे-हैन्दी निदेशालय, नागरी प्रचारिणी सभा, हिन्दी साहित्य सम्मेलन आदि संस्थानों ने हिन्दी के विकास तथा प्रचार के लिए कई प्रयत्न किए हैं। इनके साथ हमारा भी कर्तव्य है कि हिन्दी के प्रति हम उदार दृऍष्टिकोण अपनायें।

हमारे थोडे से प्रयत्नों से ही हिन्दी भाषा, भारत के लिए समस्या न बनकर, राष्ट्रीय जीवन का आदर्श बन सकती है। अत: हमें उन लोगों की मदद करनी चहिए, जो हिन्दी के प्रचार तथा प्रसार के क्षेत्र में प्रयत्नशील है।

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