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आधुनिक समाज में स्त्रियों की भूमिका

Feed by Kumar Sanu Cat- Essay

आज की भारतीय स्त्रियों अपनी एक अलग पहचान बनाने में सफल हो पाई है। इस कार्य के लिए उसने वर्शो मेहनत की तथा आज वह इस मुकाम पर है कि प्रत्येक क्षेत्र में उसे पुरुषों के समान अधिकार प्राप्त हैं तथा वह पुरुषों के साथ कन्धे-से-कन्धा मिलाकर चल रही है।  

आज की स्त्रियों हर क्षेत्र में आगे है चाहे वह प्रशासनिक सेवाएं हों, विदेश सेवा हो या वह एयर होस्टेस, सैनिक, डोक्टर या वकिल आदि कुछ भी हो। वह हर जगह पुरुषों से आगे स्थान प्राप्त करती है। सन्युक्त राष्ट्र संघ ने 1975 को अंतर्राष्ट्रीय महिला वर्ष घोषित किया था। उस समय हमारे देश की प्रधामंत्री श्रीमती इन्दिरा गान्धी थी।

स्त्रियों पुराने समय में घर-परिवार की सभी जिम्मेदारियों को पुरा करती थीं तथा घर में कैद होकर रहती थी। परन्तु धीरे-धीरे उसे आगे बढने का मौका दिया गया वह आज कई क्षेत्रों में पुरुषों से भी आगे है। स्त्रियों आज घर के साथ-साथ घर के बाहर के सभी कार्य पुरुषों के कन्धे –से-कन्धा मिलाकर करती है।

परंतु आज भी स्थिति उतनी नही सुधरी। दहेज की मांग को लेकर आज भी दुल्हनों को प्रतारणा दिया जाता है। उन्हें उनके ससुराल वालो6 के द्वारा इतना सत्या जाता है कि वह स्वयं आत्मदाह कर लेती है या मार दी जाती है। शादी तो लडका-लडकी की होती है फिर दहेज के लिए लोग क्यों एक लडकी की जिन्दगी बर्बाद कर देते हैं। लडकी को शादी अपनी इच्छा से करने का अधिकार होना चाहिए तथा अपना जीवन अपनी इच्छा से जीने की छूट भी होनी चाहिए।

हमारे देश में स्त्रियों को सदैव से देवी का दर्जा दिया गया है। आज भी मन्दिरों में देवियों की ही पूजा होती है। वह भी तो स्त्रियों ही हैं। परंतु आज की आधुनिक स्त्रियों को भी कई मुस्किलों का सामना करना पडता है जैसे अपने अधिकारियों था सहयोगियों की बदतमीजियां, परिवार व पेशंट की विमुखता आदि।

आज के भारत में स्त्रियों ने अपना एक अलग मुकाम बनाया है तो देश को उसका साथ देना चाहिए तथा उसे अधिकार देने चाहिए।

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