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युद्ध की भयानकता

Feed by Kumar Sanu Cat- Essay

पुराने समय से ही मनुष्य़ आपस में लडता आया है। परंतु समय बीतने के साथ-साथ यह लडाई और भयानक होती गई है। 20वीं शताब्दी ने दो विश्वयुद्धों को देखा है तथा इन युद्धों में हजारों जवानों की मौत हो गई तथा शहर-के-शहर धरती में मिल गए यहां तक कि स्कूल तथा हॉस्पिटल भी नहीं बचे।

विज्ञान ने मिसाइल, सुपरसोनिक प्लेन, एटम बम तथा हाइड्रोजन बम का आविष्कार कर युद्ध को और भी भयानक बना दिया है।

पुराने समय में जब युद्ध होता था तो केवल देश के सैनिक युद्ध करते थे तथा नागरिक शांति से घरों में रहते थे। परंतु आज के युद्ध में नागरिक तथा सैनिकों में कोई अंतर नहीं होता। बम आसमान से मौत की वर्शा करते है। आज के युग में युद्ध में हॉस्पिटल, घर, स्कूल, आदि सभी को केन्द्र बनाया जाता है। बमों की वर्षा के बाद शहर में सब तरफ दर्द, दुख और मौत के अलावा कुछ दिखायी नहीं देता। सब कुछ अव्यवस्थित हो जाता है। आदमी, औरत तथा बच्चे अपने घरों में जिन्दा दफन हो जाते हैं।

एटम बम सबसे भयानक आविष्कार है। एक एटम बम ने जापान के पूरे हिरोशिमा नगर को नष्ट कर दिया था। यह दूसरे विष्व युद्ध का नजारा था। तीसरा विश्व युद्ध तो संसार को कुछ ही मिनटों में नष्ट कर सकता है। समय बीतने के साथ-साथ कई देशों ने न्यूक्लियर बमों का निर्माण कर लिया है। आज का विश्व एटॉमिक पावर का शिकार है तथा संसार में इस समय 60 करोड टन टी.एन.टी. TNT उपलब्ध है। जिससे संसार को 10 बार नष्ट किया ज सकता है।

आजकल युद्ध की आग कुछ धीमी है। आज के विमान तथा मिसाइल आवाज की गति से भी तेज गति से चलते हैं।

यदि कभी-भी युद्ध की हवा चली तो मानवता का अंत निश्चित है। विश्व में शांति के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ ने बहुत प्रयास किए हैं तथा सम्पूर्ण विश्व-संघ का आभारी है। तथा सभी देश इस नेक काम में संघ के साथ कदम मिलाकर चल रहे हैं। यदि कोई भी देश संयुक्त राष्ट्र के नियमों का उल्लंघन कर अपने निजी हितों को विश्वहित से ऊपर रखते हुए शांति के नियमों का उल्लंघन करता है तो उस देश के विरुद्ध कार्यवाही का अधिकार भी संयुक्त राष्ट्र के पास है।

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