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डाकिया

Feed by Kumar Sanu Cat- Essay

डाकिया हमारे समाज का बहुत ही छोटा परंतु एक महत्वपूर्ण अंग है। यह गांव, नगरों तथा शहरों में रहने वाले लोगों का अंतरंग मित्र है। यह डाक विभाग का अमिन्न अंग है। वह खाकी वर्दी पहनता है।

डाकिये का दिन सुबह से ही शुरु हो जाता है। वह बहुत सुबह डाकघर पहुंच जाता है। तथा डाकघर पहुंचते ही वह अपने काम में जुट जाता है। वह डाक पत्रों तथा डाक बस्तों को उनके क्षेत्रों के अनुसार बांट कर उन्हें अलग-अलग करता है तथा इन पत्रों को वह अपने क्षेत्र के घरों के हिसाब से रखकर अपने कार्य पर बल देता है।

वह लोगों को उनके घरों में जाकर पत्र, पार्सल तथा मनीआर्डर देता है। यह सभी पत्रों को चमडे के बैग में रखता है। छोटे गांवों तथा नगरों में वह यह काम पैदल चलकर करता है। परंतु बडे शहरों में उसे इस कार्य के लिए साइकिल दी जाती है तथा कुछ शहरों में डाकिये यही काम मोटर साइकिल पर करते हैं।

डाकिये का कार्य बहुत ही आसान लगता है, परंतु यह बहुत ही मेहनत भरा काम है। वह अपना कार्य पूरी लगन और मेहनत से करता है, गर्मी हो या सर्दी, सूखा हो या बरसात डाकिया अपना कार्य नियमित रुप से करता है।

उसके क्षेत्र में रहने वाले सभी लोगों के साथ वह परिवार के सदस्य की तरह व्यवहार करता है। डाकिया सभी लोगों को सूख तथा दुख दोनों प्रकार के सन्देश देता है। कुछ लोगों को वह ऐसी खबर देता है, जिससे उनका दिल टूट जाता है तथा इसके विपरीत वह कुछ लोगों को खुशी की खबर सुनाता है। छात्रों में कुछ को पास होने की खबर सुनाकर उनके दुख में दुखी होता है।

डाकिया सुख-दुख, निवेदन-शिकायत, मृत्यु और जन्म सभी खबरें लोगों तक पहुंचाता है। किंतु कितनी अजीब बात है कि डाकिया इन खबरों के विषय में पूर्व जानकारी न होने पर भी उन्हें अपने साथ लाता है तथा लोगों तक पहुंचाता है।

डाकिया हमारे सभी के जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग है, वह बहुत मुश्किलों से भरी जिन्दगी जीता है। उसकी वर्दी को और अधिक आकर्षक बनाना चाहिए। अधिक सुविधायें उसकी जिन्दगी को सुविधा –जनक तथा सुखी और बेहतर बना सकती है।

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