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हमारा देश-भारत

Feed by Kumar Sanu Cat- Essay

हमारा देश-भारत विश्व का सबसे प्राचीन देश है। यह देश ऋषि-मुनियों, मनीषियों-महापुरुषों, समाज सुधारकों तथा आदर्श पुरुषों की भूमि है। ‘भारत’ का नाम, दुष्यंत तथा शकुंतला के वीर पुत्र ‘भारत’ के नाम पर पडा था। यह प्राचीन देश, विश्व-गुरु, धरती का स्वर्ग, देवताओं की जन्म-भूमि तथा प्रकृति की क्रीडा-स्थली रहा है। दुनिया की अनेक संस्कृतियां मिट गई, परंतु भारत की संस्कृति आज भी जीवित है।

भारत कभी सोने की चिडिया के नाम से जाना जाता था। परंतु गुलामी की जंजीरों में जकड कर विदेशियों ने हमारी सारी सम्पति लूट ली। यहां के लोग अपनी शक्ति, साहस, वीरता एवं एकता को भूल गए हैं। हमारे देश के वीरों की कोशिशों के कारण 15 अगस्त, 1947 को हमारा देश गुलामी की जंजीरों को तोडकर आजाद हुआ तथा एक लोकतंत्र के रुप में उदित हुआ।

हिमालय से लेकर कन्याकुमारी तक फैला हमारा देश संस्कृतियों, धर्मों भाषाओं तथा सम्प्रदाओं का संगम है। हमारे देश में गंगा-यमुना की पवित्र धाराएं बहती है। हिमालय हमारे देश की अमूल्य धरोहर है। गीता, कुरान, बाईबल, रामायण तथा गुरु ग्रंथ साहिब हमारे देश के अमूल्य ग्रंथ है।

स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व हम छोटी-छोटी चिजों, वस्तुओं के लिए विदेशों के मोहताज थे। परंतु आज हम बडी-बडी मशीनें, वस्त्र आदि विदेशों में निर्यात करते हैं विज्ञान के क्षेत्र में भी भारत ने एक अमूतपूर्व प्रगति की है। भारत के वैज्ञानिकों ने पृथ्वी, अग्नि, नाग, त्रिशूल, वज्र आदि प्रक्षेपास्त्रों के सफल परीक्षण ने यह सिद्ध किया है कि वे किसी से पीछे नही है। परमाणु परीक्षण करके भारत ने विश्व को चौंका दिया है। परंतु इतनी प्रगति के बावजूद भारत में आज भी भाषा, धर्म, सम्प्रदाय एवं जाति-पांति के नाम पर दंगे-फसाद होते रहते है। जिससे भारत को आज भी काफी जान-माल की हानि होती है।

भारत-भूमि राम, कृष्ण, बुद्ध, महावीर, नानक, विवेकानन्द, स्वामी दयानन्द, नेहरु, गांधी जैसे महापुरुषों की भूमि है।

हमें आपस में एकता से रहकर इन महापुरुषों का सम्मान करना चाहिए। सभी धर्मो का आदर करना चाहिए।

अपनी जान की बाजी लगाकर देश की अखण्डता, एकता और स्वाधीनता की रक्षा करनी चाहिए तथा अपने देश का सम्मान करना चाहिए।

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