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रेलवे स्टेशन का दृश्य

Feed by Kumar Sanu Cat- Essay

आज का युग विज्ञान का युग है। आज एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए तीव्रगामी साधन उपलब्ध हैं परंतु रेलगाडी का अपना एक अलग महत्व है। इतनी अधिक संख्या में भिन्न-भिन्न स्थानों पर रुककर यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने वाला यातायात का ऐसा कोई साधन नही है, जिसके तुलना रेलगाडी से की जा सके। रेल यात्रा सदैव रेलवे स्टेशन से प्रारम्भ होती है तथा रेलवे स्टेशन पर ही इसका अंत होता है।

मै अपने पिता तथा छोटी बहन के साथ कानपुर चचेरे भाई की शादी में शामिल होने के लिए जा रहा था। रेलवे स्टेशन का दृश्य बहुत सुखद था।

बहुत-सी टैक्सी, कार, स्कूटर, रिक्शा और तांगे वेटिंग रुम (Waiting Room) के बाहर खडे थे। वेटिंग रुम यात्रियों से खचाखच भरा हुआ था। बुकिंग खिडकी पर लोगों की लाइन लगी हुई थी तथा लोग एक-के-बाद एक टिकट खरीद रहे थे। कुली अपने कार्य में व्यस्त थे। वे यात्रियों का सामान लाने तथा बाहर ले जाने का कार्य कर रहे थे। मेरे पिताजी ने मेरे तथा बहन के लिए व अपने लिए टिकट खरीद ली। उन्होंने हमारा समान उठाने के लिए एक कुली किराये पर लिया। फिर हम प्लेटफार्म के उस भाग में पहुंचे जहां से हमारी ट्रेन को चलना था।

प्लेटफार्म स्वयं में एक पूर्ण दुनिया होता है। यहां अमीर-गरीब, पढे-लिखे, अनपढ, जवान, बुढे सभी धर्मों के लोग यहां मौजूद होते हैं। हम जिस प्लेटफार्म पर खडे थे वहां भी कुछ ऐसा ही माहौल था। सभी का उद्देश्य ट्रेन का इंतजार था। सभी अपना समय बिताने के लिए विभिन्न विषयों पर चर्चा कर रहे थे। परंतु सभी का मुख्य विषय ट्रेन थी।

प्लेटफार्म चमकते हुए बैग, बडे-बडे बण्डलों तथा गन्दे सन्दूकों से भरा हुआ था। औरतें अपने सामान पर बैठी हुई थीं। कुछ लोग बैंचो पर बैठे थे तथा कुछ लोग हाथ में सिगरेट लिए हुए आने-जाने वाले लोगों को देख रहे थे। पूरा वातावरण शोर-शराबे तथा बच्चों के रोने के कारण गूंज रहा था। सामान बेचने वाले पूरे जोर-शोर से अपना सामान बेच रहे थे।

ट्रेन के आते ही सभी लोग अपना सामान लेकर तैयार हो गए। पूरा वातावरण युद्ध क्षेत्र की तरह प्रतीत हो रहा था। जिन लोगों ने आरक्षण करवा लिया था। वे लोग अपने कम्पार्टमेंट डूंढ रहे थे तथा जिन्होंने आरक्षण नहीं करवाया था वे यहां से वहां घूम रहे थे तथा अपनी सेट ढुंढ रहे थे। जब ट्रेन चली, मै अपने कम्पार्टेमेंट में पहुंच गया था, मैने देखा कि लोग अपने रिश्तेदारों तथा जान-पहचान वालों को विदा कर रहे थे तथा ज्यादातर लोग अपने हाथ बान्धे ट्रेन को जाते हुए देख रहे थे।

इस प्रकर प्लेटफार्म का ड्रष्य बहुत ही आकर्षकतथा मनमोहक था।

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