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भोजन हमें क्या क्या देता है और इसके बिना होने वाले कमियां

Feed by sandy Cat- Health & Beauty

हमारा शरीर, सांस की एक नाजुक डोर से बंधा है। जब तक सांस चलती रहती है वह जीवित रहता है। सांस टूट जाने के बाद वह निष्प्राण हो जाता है। इस शरीर को जीवित रखने के लिए भोजन की आवश्यकता पडती है। इस भोजन में छ: रस होते है:-

खट्टे 2. मीठे 3. कडवे 4. खारे 5. चरपरे 6. कसैले।

यही रस हमारी पाचन-प्रणाली की क्रिया का आधार है। अत: भोजन ही मानव जीवन का मुख्य आधार है। जैसा हमारा भोजन होगा- उसी के अनुरुप हमारा शरीर चलेगा।

विज्ञान की दृष्टि से भोजन में मुख्य पांच तत्वों का मिश्रण होता है और वे सारे तत्व भी प्रकृति की जडी-बूटियों से ही प्राप्त होते है जो निम्न है: -

(i) प्रोटीन: मानव शरीर, असंख्य कोष्ठों का एक समूह होता है। ये कोष्ठ प्रोटीन के बने होते हैं। प्रोटीन का काम है शरीर के तंतुओं का निर्माण करना तथा शरीर के जो अवयव कमजोर पड गए हों-उन्हं शक्ति प्रदान करना।

प्रोटीन प्राप्त करने के दो साधन है।

पहला साधन:  एनीमल प्रोटींस, जो पशुओं से प्राप्त होता है। जैसे-अंडा, दूध, मांस इत्यादि बहुत ही गुणकारी माने गए है।

दूसरा साधन: प्रकृति का जो प्रोटीन हमें प्रकृति से प्राप्त होते हैं वे वनस्पतिक प्रोटींस कहलाते है। जैसे-गैहूं बांहू बाजरा, चना, दालें सूखे मेवे तथा सब्जियां आदि।

वैष्णव लोग उपरोक्त चीजों से प्रोटीन प्राप्त करते है। जब किसी प्राणी के शरीर में प्रोटींस की मात्रा अधिक पहुंच जाती है तो वह अपने आप ही चर्बी में बदल जाती है।  

(ii) वसा: हमारे शरीर में वसा, शक्ति और गर्मी पहुंचाने का काम करती है। यह शक्ति हमें तेल, घी तथा मक्खन से प्राप्त होती है। गुड और शहद एवं कुछ खाद्द पदार्थो को छोडकर शेष सब चीजों में वसा पाई जाती है।

वसा मानव शरीर में ईंधन का काम करती है। जब कोई प्राणी बीमार हो जाता है-उस स्थिति में यह चर्बी ही शरीर को सुरक्षित शक्ति पहुंचाती है, जिससे बीमारी की हालत में भी प्राणी में शक्ति बनी रहती है।

(iii) खनिज लवण: हमारे शरीर, में खनिज लवण भी प्रोटीन का ही काम करते हैं। थोडी-सी मात्रा में यह शरीर के कोषों में रहते है। प्रोटींस की भांति ही यह भी शरीर को शक्ति प्रदान करते हैं। यह भोजन द्वारा उत्पन्न होकर शरीर को स्वस्थ रखते है। इनकी मात्रा सब्जियों और फलों में अधिक होती है। लवण की कमी के कारण शरीर में हड्डियों का रोग उत्पन्न हो जाता है अर्थात उनकी हड्डियां कमजोर होकर टेढी-मेढी हो जाती है? रोग का कारण भी शरीर में लवण की कमी होती है। गले भी इसी कारण फूल जाते है।

प्रोटींस, लवण से मिलकर शरीर को निरोगी व सुन्दर बनाते हैं। जिन लोगों के चेहरे लाल होते है, उनके शरीर मं कैलशियम और लवण की कमी नहीं होती है। ऐसे व्यक्तियों को हरे पत्ते वाली सब्जियों का अधिक से अधिक मात्रा में प्रयोग करना चाहिए।

मूली, शलगम, गाजर, चुकन्दर तथा सरसों के साग में कैलशियम अधिक मात्रा में पाया जाता है।

(iv) कार्बोहाइड्रेट्स: हमारे शरीर में गर्मी के साथ-साथ वसा भी बनाने का काम होता है। इसमें दो आहार तत्व अधिक मात्रा में पाये जाते हैं, जो निम्न है।

चीनी  2. स्टार्च ।

मैदा और साबूदाने में जो सफेद लेस-सा चिपचिपा पदार्थ होता है- उसी को स्टार्च कहते है। स्टार्च और चीनी के मिश्रण से ही काबोहाइड्रेट्स की उत्पत्ति होती है। हमारे शरीर में इसका केवल एक ही काम है-ये जलकर शरीर मं शक्ति पैदा करता है। स्टार्च की तुलना में चीनी ज्यादा तेज व जल्दी जलती है। शारीरिक मेहनत का काम करने वाले लोगों को इसकी अधिक मात्रा की आवश्यकता होती है। वैसे यह तत्व दूध चीनी, अनाजों के अलावा फलों और सब्जियों से भी प्राप्त होता है। मुख्य रुप से यह – शकरकन्द, आलू, चुकन्दर आदि में यह अधिक मात्रा में पाया जाता है।

(v) विटामिंस: हमारे शरीर, को स्वस्थ रखने के लिए विटामिंस की बहुत जरुरत होती है विटामिंस के बिना शरीर खोखला एवं बेकार हो जाता है। विटामिंस भी पांच तरह के होते है, जिनकी अलग-अलग उपयोगिता है।

      विटामिन ए: जिन लोगों के शरीर मं विटामिन ए की कमी हो जाती है –उन्हे रतौन्ध का रोग हो जाता है। ऐसे रोगियों को रात को दिखाई नही देता।

      विटामिन बी: विटामिन बी की कमी से शरीर शिथिल पड जाता है। बदन टूटा-टूटा सा रहता है। इसके अतिरिक्त और भी अनेक रोग उत्पन्न हो जाते है।

      विटामिन सी: शरीर में विटामिन सी की कमी से आदमी के दांत कमजोर हो जाते हैं और मसूडों से खून निकलने लगता है। मसूडे सूज जाते है।

      विटामिन डी: शरीर में विटामिन डी की कमी के कारण फेफडे कमजोर पड जाते हैं। हड्डियां कमजोर पड जाती है। दांतों में कीडा लग जाता है। स्नायु रोग भी हो जाता है।

      विटामिन ई: शरीर में विटामिन ई की कमी से आंखों के अनेक रोग उत्पन्न हो जाते है। मस्तिष्क पर भी इसका प्रभाव पडता है।

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