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पीली जडी से रोगों का सम्पूर्ण उपचार

Feed by sandy Cat- Health & Beauty

पीली जडी को पीत मूला बूटी भी कहते हैं। इसका पौधा 1 मीटर तक लम्बा होता है, जिसे तोडने पर उसका रंग पीला हो जाता है इसीलिए इसे पीली जडी कहा जाता है। इसके सफेद रंग के फूल जून-जुलाई में खिलते हैं। यह उतरी हिमालय में 3000 मी. की ऊंचाई तक पाया जाता है। इसकी तासीर होती है। यह केवल औषधि रुप में ही उपयोग की जाती है।

बुखार एवं पेट दर्द: यह जडी बुखार तथा पेट दर्द में अत्यंत लाभदायक सिद्ध होती है। इसकी जड का काढा बनाकर रोज सुबह-शाम आधा कप काढा रोगी को सेवन कराने से एक हफ्ते में ही बुखार ठीक जाता है। दर्द दूर हो जाता है तथा पेट की पाचन क्रिया भी ठीक हो जाती है, क्योंकि इस जडी का काढा पेट में पहुंच कर जठर रस बनाता है।

आंख के रोग: आंख के रोगों में इस जडी का सुरमा बनाकर आंखों में प्रयोग करने से आंख के समस्त रोग कुछ ही दिनों के प्रयोग से ठीक हो जाते हैं।

कास, श्वांस एवं फुफ्फुस रोग: यूनानी लोग इसकी जडी के काढे का प्रयोग उपरोक्त रोगों में करते हैं और कुछ ही दिनों के प्रयोग से रोग ठीक हो जाते हैं- क्योंकि यूनान में चिकित्सा की पद्धिति अपनायी जाती है जो हकीमी कहलाती हैं, जिसमें जडी बूटियों को काढे के रुप में प्रयोग किया जाता है।

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