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गिलोय से रोगों का उपचार

Feed by sandy Cat- Health & Beauty

गिलोय एक आरोही लता के रुप में होती है। जो लोग अक्सर इसका सेवन करते रहते हैं-वो कभी बीमार नहीं होते और उम्र भी लम्बी पाते हैं। यह लम्बी आयु वाली आरोही लता कहलाती है। इस पर माह अप्रैल मई में फूल खिलते हैं और मई में ही इस पर फल आते हैं। इसका रस बहुत कडुवा होता है।

इसके प्रयोग की मात्रा निम्न है: -

  • चूर्ण के रुप में इसकी मात्रा केवल :- 2 ग्राम एक बार के सेवन में।
  • काढे के रुप में इसकी मात्रा केवल : - 4 तोला एक बार के सेवन में।
  • स्वरस के रुप में इसकी मात्रा केवल :- एक तोला तक एक बार के सेवन में।
  • सत्व के रुप में इसकी मात्रा केवल :- 3 माशा तक एक बार के सेवन में।

विषम ज्वर तथा पीलिया रोगों के लिए:  विषम ज्वर तथा पीलिया के रोग में रोगी द्वारा इसके स्वरस का सुबह शाम 15 दिन तक सेवन करने से ही दोनों रोग दूर हो जाते हैं।

कुष्ठ, कंडु, वात ज्वर, जीर्ण ज्वर तथा प्रमेह रोगो के लिए अचूक उपचार: उपरोक्त सभी रोगों में गिलोय की जड का काढा रोगी को सुबह-शाम एक माह तक सेवन कराने से उपरोक्त रोग दूर हो जाते हैं।

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