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राजपाठा से रोगों का उपचार

Feed by sandy Cat- Health & Beauty

राजपाठा बहुवर्षीय आरोही लता का एक अंग है। इसके फूल छोटे मंजरियों के रुप में पीले और नारंगी रंग के होते हैं, जो मई-जून, माह में खिलते हैं। अगस्त-सितम्बर में इसके फल उगते हैं। यह हिमालय की 2000 मीटर ऊंची चोटियों पर पाया जाता है।

औषधि रुप में इसकी निम्न मात्रा ही दवाई रुप में प्रयोग करना चाहिए।

बडो को चूर्ण की मात्रा 2 ग्राम, बच्चों ओ 1 ग्राम एक बार में।

बच्चों के पेट रोग, अतिसार एवं अर्श: राज पाठा बच्चों के पेट रोगों में अत्यंत लाभकारी है। इसकी जड का चूर्ण 1 ग्राम गाय के दूध को जमा कर बनाए गए दही के साथ सुबह शाम दस दिन तक सेवन करायें। पेट के समस्त रोग दूर हो जाएंगे।

मूत्र रोग: मूत्र रोगों में राजापाठा की जद का चूर्ण सुबह शाम 2-2 ग्राम गाय के दूध के साथ रोगी को सेवन कराने से 20 दिन में ही मूत्र के रोगों से मुक्ति मिल जाती है। जैसे, मूत्र में जलन, रुक-रुककर मूत्र आना। मूत्र का रंग पीला होना आदि।

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