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वरुण से रोगों का उपचार

Feed by sandy Cat- Health & Beauty

वरुण को लोग अमर प्रिय भी कहते हैं। यह मध्यम कद का पर्णपति वृक्ष है। इस पर सफेद रंग के गुच्छेदार फूल खिलते हैं, जिन पर बहुत भंवरे मंडराते रहते हैं। इसके फल कागजी नींबू की तरह गोलाकर होते हैं, लिकिन पकने पर लाल रंग के हो जाते हैं। इसके फूल फरवरी-मार्च में खिलते हैं तथा फल अफस्त में आते हैं।

गंडमाला एवं विद्रधी: गंडमाला और विद्रधी रोग में वरुण की जड का काढा शहद मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम पीने से एक माह के अन्दर ही रोग दूर हो जाते है।

मूत्र रोग: जिन लोगों के मूत्र में जलन होती है, पीले रंग का मोत्र रुक-रुककर आता है। ऐसे रोगी को प्रतिदिन सुबह-शाम वरुण की जड का काढा सेवन कराने से 20 दिन में ही मूत्र रोग दूर हो जाते हैं। मूत्र की जलन खत्म हो जाती है। मूत्र खुलकर आता है और मूत्र का पीलापन भी दूर हो जाता है।

अश्मरी रोग ; अश्मरी रोग में वरुण की जद के काधे में वरुण की छाल का 3 ग्राम चूर्ण मिलाकर रोगी को सुबह शाम सेवन कराने से 15 दिन में रोग दूर हो जाता है।

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