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पित्तपापडा से रोगों का उपचार

Feed by sandy Cat- Health & Beauty

पित्तपापडा का पौधा अधिकतर गेंहू की फसल के साथ ही पैदा होता है। इसके आधा मीटर ऊंचाई के कमजोर पौधे होते हैं, जो आसानी से टूट जाते हैं। इनके फूल भी छोटे होते हैं, जो जनवरी-फरवरी में पौधों पर खिलते हैं। इसके अलग प्रांतों में अलग-अलग नाम हैं। जैसे, पंजाब, उत्तर प्रदेश, एवं बिहार में पित्तगाडा कहते हैं। गुजरात के क्षेत्र में क्षेत्रर्पट और केरल एवं मालाबार में पर्पट कहा जाता है। इसके बीजों को कई अन्य जडी बूटियों में मिलाकर पाक तैयार किया जाता है, जो और भी कई रोगों के उपचार में काम आता है।

आम सर्दी जुकाम: ठण्डे मौसम में अक्स्र सर्दी लग जाती है जिससे नजला जुकाम हो जाता है। ऐसे रोगी को पित्तपापडा का काढा बनाकर प्रतिदिन सुबह शाम देने से पांच दिन के सेवन से ही सर्दी, नजला, जुकाम दूर हो जाता है।

बुखार, जब्ज रोग होने पर: बुखार और कब्ज हो जाने पर रोगी को पित्त पापडा का एक कप काढा सुबह-शाम पिलाने से रोगी को खूब पसीना आता है और मूत्र खुलकर होता है, जिससे व्यक्ति रोग मुक्त हो जाता है। कब्ज भी दूर हो जाती है और शरीर भी हल्का हो जाता है।

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