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अफीम से रोगों का उपचार

Feed by sandy Cat- Health & Beauty

अफीम की खेती की जाती है। इसके पुष्प नीली आभा वाले सफेद रंग के होते है। इसके हर पौधे पर 6 से 8 फल तक लगते है। इसके फल पर सुबह के वक्त चीरा लगाकर उसमें से निकलने वाला दूध जैसा पदार्थ प्राप्त किया जाता है, जो सूखने पर अफीम बन जाती है। इसके फल को पोस्ट डोडा कहते है। भारत में इसकी खेती उत्तर प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र, बिहार, राजस्थान, काश्मीर तथा गढवाल क्षेत्रों में की जाती है। अफीम वास्तव में एक नशीली तथा विषैली औषधि होती है। अफीम को संख्या भी कहते है। इसको शुद्ध करने के बाद औषधि योगों में प्रयोग किया जाता है।

दवाई के रुप में इसकी मात्रा निम्न होती है। पोस्टडोडा का चूर्ण की मात्रा 2 ग्राम एक बार में।

खसखस के दाने- जरुरत के अनुसार अधिक से अधिक 10 ग्राम तक अफीम 20 मिली. ग्राम से 60 मिली ग्राम तक एक बार में।

पेचिश दस्त एवं संग्रहणी: पचिश, दस्त एवं संग्रहणी रोग में अफीम के चूर्ण को अन्य दवाओं के साथ मिलाकर रोगी को सुबह-शाम पानी के साथ सेवन कराने से 10 दिन में ही रोग दूर हो जाता है।

सिर दर्द: सिर में कैसा ही अर्द हो, नजले-जुकाम का हो, गर्मी से हो अथवा आधा सीसी का हो या चोट लगने के कारण दर्द हो-ऐसे, रोगी को खसखस के बीजों को एक गिलास दूध में घोंट कर उसमें मिश्री अथवा शहद मिलाकर सुबह-शाम सेवन कराने से एक हफ्ते में ही सिर के तमाम दर्द दूर हो जाते हैं।

नपुंसकता: नपुंसकता के रोगी को अफीम का बाजीकरण योग बनाकर (अन्य मेवाओं के साथ) जैसे, बादाम, काजू, मुनक्का, केसर एवं शेहद, छोटी इलायची आदि घोंट पीसकर पाक तैयार कर लें और फिर एक चम्मच सुबह-शाम गाय के दूध के साथ सेवन कराने से 40 दिन के अन्दर नपुंसकता दूर हो जाती है। वीर्य में वृद्धि होती है। नया खून बनता है। नई शक्ति पैदा होती है।

कफ तथा खांसी: कफ तथा खांसी के रोग में अफीम का चूर्ण, शहद के साथ सुबह-शाम रोगी को सेवन कराने से 10 दिन में कफ साफ हो जाता है तथा खांसी का रोग दूर हो जाता है।

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