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खोखरु से रोगों का उपचार

Feed by sandy Cat- Health & Beauty

खोखरु का पौधा जमीन पर लेटे हुए ही बढता है, जो कांटों से भरा होता है। इसका कांटा बडा गुणकारी माना जाता है, लेकिन मानव शरीर मं चुभ जाए तो लगता है, जैसे किसी कुत्ते ने काट लिया हो। इसके फूल अफस्त सितम्बर में खिलते हैं और फल अक्टूबर नवम्बर में लगते हैं। रोग में दवा की निम्न मात्रा का सेवन करना चाहिए।

फल का चूर्ण केवल 4 ग्राम तक एक बार में सेवन करें।

बाजीकरणार्थ रोग:  इस रोग से पीडित रोगी को गोखरु का चूर्ण बनाकर प्रतिदिन सुबह-शाम गाय के दूध के साथ 45 दिन तक लागातर सेवन कराने से रोग दूर हो जाता है।

आमवात: आमवात के रोग में गोखरु तथा शुंष्ठि का काढा बनाकर सुबह-शाम रोगी को 15 दिन तक सेवन कराने से आमवात का रोग दूर हो जाता है।

मूत्र रोग: मूत्र रोगों में गोखरु पंचाग का काढा शहद तथा मिश्री के साथ सुबह-शाम रोगी को 20 दिन तक सेवन कराने से मूत्र रोग दूर हो जाते है।

गर्भाशय शोध, गर्भस्त्राव : महिलाओं के गर्वस्त्राव तथा गर्भाशय शोध में गोखरु का चूर्ण प्रतिदिन सुबह-शाम दूध में उबाल कर देने से 20 दिन में ही रोग दूर हो जाते है।

शूगर रोग व प्रमेह: शूगर और प्रमेह रोग में गोखरु का चूर्ण सुबह शाम ताजे पानी के साथ रोगी को तीन माह तक सेवन कराएं। रोग ठीक हो जाएंगे।

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