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रीठा से रोगों का उपचार

रीठा का वृक्ष बडा तथा पत्ते लम्बे होते हैं। इसके हल्के गुलाबी रंग के फूल ही फलों का रुप धारण कर लेते हैं। इसेसे फैन पैदा होता है। इसका फल पानी में डालने पर झाग उत्पन्न करता है। यह आसाम, उत्तर प्रदेश, तथा बंगाल में पाया जाता है। यह केवल औषधि रुप में ही प्रयोग किया जाता है।

हिस्ट्रीरिया के रोग: हिस्ट्रीरिया के दौडे पडने वाले रोगी को रीठे के छिलकों को जलाकर उसका धुंआ देना चाहिए। एक माह तक इसकी धूनी के प्रयोग से ही हिस्ट्रीरिया के दौडे पडने बन्द हो जाते है।

सिरदर्द: सिर दर्द कैसा भी हो पूरे सिर का दर्द हो या आधे सिर का। गर्मी से हो या सर्दी जुकाम से। ऐसे रोगी को रीठा के रस को केवल दो बून्दें डालने से तीन दिन में ही सिर दर्द दूर हो जाता है।

वात, कफ एवं कुष्ठ कुंडू रोग: वात, कफ ओरु कुष्ठ कुंडू रोग में रीठा के बीजों का चूर्ण 2-2 ग्राम सुबह-शाम गुनगुने पानी के साथ 10 दिन तक सेवन कराने से रोगी को उपरोक्त रोगों से मुक्ति मिल जाती है।

बालों मे लाभकारी: महिलाओं के बालों के लिए रीठा बहुत उपयोगी है। जो महिलायें अपने बाल रीठा के सत से धोती हैं-उनके बाल काले, मजबूत व लम्बे हो जाते हैं।

विशेष सावधानी: बडों को नाक में रीठा के रस की केवल दो बून्दे ही प्रयोग करनी चाहिए। इससे अधिक नहीं वरना हानिकारक हो जाएंगी।

बच्चों की नाक में केवल एक बून्द का ही सेवन कराना चाहिए, इससे अधिक का सेवन हानिकारक हो सकता है।

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