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वनफसा से रोगों का उपचार

वनफसा का पौधा बहुत छोटा होता है, जो पहाडी क्षेत्रों में पाया जाता है। इसके फूल बहुत छोटे औ बैंगनी रंग के होते हैं। इसके फल को वनफसा एवं इसके फूल को गुलवनफसा कहते हैं। यह पूरा पौधा ही लाभदायक होता है। ये हिमाचल प्रदेश व काश्मीर की पहाडी चोटियों पर ऊचाइयों पर उगते हैं।

गले के रोग के लिए लाभदायक: इन लोगों के गले अन्दर से पक जाते हैं। सूज जाते हैं, जिसकी वजह से पानी पीने में भी कठिनाई होती है ऐसे रोगियों को 5 नग वनफसा को देसी घी में तलकर, दूध में डालकर सुबह-शाम उस दूध का सेवन करायें तथा उसमें से वनफसा के फल को निकालकर गले पर बांध दें। 10 दिन के इस प्रयोग से ही गले का यह रोग दूर हो जाता है।

नजला-जुकाम: जिन लोगों को नजले-जुकाम की शिकायत रहती है। उनके लिए वनसफा के 4 फल लेकर पहले देसी घी में भूनें और फिर उसे गाय के दूध में उबाल कर मिश्री के साथ दूध का सेवन कराने से केवल हफ्ते के अन्दर ही नजला-जुकाम दूर हो जाता है।

खांसी: जिन लोगों को आए दिन खांसी की शिकायत रहती है-उनके लिए वनफसा के दो फल तथा थोडी-सी मुलेठी को कूटपीस कर चाय के साथ उबाल कर छान लें और फिर उस चाय का सुबह-शाम रोगी को सेवन करायें। एक हफ्ते के प्रयोग से ही खांसी जड से चली जाएगी।

पेट रोग: जिन लोगों को पेट खराब होने की शिकायत रहती है, पेट में कब्ज रहती है तथा बदहजमी बनी रहती है-ऐसे रोगी को वनफसे का शर्बत बनाकर सुबह-शाम सेवन कराने से दस दिन में ही पेट के तमाम रोग दूर हो जाते हैं।

मूत्र रोग: जिन लोगों को मूत्र रूक-रूककर जलन व दर्द के साथ आता है-ऐसे रोगी को वनफसे का शर्बत सुबह-शाम एक हफ्ते तक सेवन करायें। मूत्र विकार दूर हो जाएंगे।

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