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कांकडा सिंगी से रोगोपचार

कांकडा सिंगी का वृक्ष मध्यम आकार का होता है, परंतु इसके पत्ते लम्बे व नुकीले होते हैं। इसके फूल छोटे-छोटे दलपत्र रहित एकलिंगी मंजरियों में खिलते हैं जो लाल रंग के होते हैं, जो बाद में फल बन जाते हैं, जिन्हें कृमि कहते हैं। इसकी शाखाओं पर श्रृंग के समान कृमि गह्वर लगते हैं, जिन्हें कांकडा सींगी कहते हैं। इसके वृक्ष हिमालय की घाटियों में पाये जाते हैं। इसका प्रयोग भी केवल औषधि रुप ही किया जाता है।

बच्चों श्वांस रोग: कभी-कभी बच्चों को भी श्वांस का रोग उत्पन्न हो जाता है। ऐसे रोगी को कांकडा सींगी का 1 ग्राम चूर्ण शहद या मक्खन के साथ मिलाकर नित्य सुबह-शाम 20 दिन तक सेवव कराने से श्वांस का रोग दूर हो जाता है।

खांसी तथा दमा: जिन लोगों को पुरानी खांसी या दमे का रोग है- उनको 2 ग्राम कांकडा सींगी का चूर्ण दो चम्मच च्यवनप्राश में मिलकर सुबह-शाम सेवन करायें। 60 दिन के सेवन से ही पुरानी खांसी या दमा का रोग चला जाता है।

जुकाम-बलगम: कुछ लोगों को अक्सर जुकाम होने के साथ ही शरीर के अन्दर बलगम बनने लगता है, ऐसे रोगी को 2 ग्राम कांकडा सींगी का चूर्ण सुबह शाम गुनगुने पानी के साथ सेवन कराने से 10 दिन में ही रोग दूर हो जाता है और बलगम साफ हो जाता है।

बादी: बहुत से लोगों का शरीर बादी के कारण फूल जाता है लेकिन ऐसा मोटापा व्यक्ति के लिए हानिकारक होता है। ऐसे रोगी को कांकडा सींगी का 2 ग्राम चूर्ण शहद तथा नींबू के रस में मिलाकर सुबह-शाम 20 दिन तक सेवन कराने से शरीर की बादी से छुटकारा मिल जाता है

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