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सेमर से रोगों का उपचार

सेमर आम तौर से जंगलों में पैदा होने वाला वृक्ष है। यह वृक्ष मध्यम कद का होता है, जिसका तना काफी मोटा होता है। उस तने से एक प्रकार का प्राकृतिक रस अपने आप बाहर निकलकर जम जाता है-जिसे मोच रस कहते है। इस रस में काफी चिकनाहट होती है। यह कांटेदार वृक्ष कई वर्षो तक जीवित रहता है। इस पर मार्च अप्रैल के महीने में फूल खिलते हैं तथा जुलाई अगस्त में इस पर फल लगते हैं। इसका मोच रस औषधि रुप में प्रयोग किया जाता है।

वीर्य का वृद्धि करता है: जिन पुरुषों के शरीर में वीर्य की कमी होती है अथवा गलत साधनों से अपने वीर्य को नष्ट कर डालते हैं-ऐसे लोगों को 5 ग्राम मोच रस 10 ग्राम मिश्री अथवा शहद में मिलाकर सुबह-शाम गाअय के दूध के साथ 3 माह तक सेवन करायें। वीर्य में वृद्धि हो जाएगी और शरीर में एक नई शक्ति बर जाएगी। नए स्फूर्ति आ जाएगी।

व्रण तथा प्रसवकाल: जिन महिलाओं को प्रसव के समय अधिक कष्ट होता है और फिर भी बच्चे का जन्म आसानी से नही होता ऐसे समय पर उन महिलाओं के पेट पर या पेडू पर सेमर की छाल को पानी में पीसकर लेप कर देने से तथा 3 ग्राम छाल के चूर्ण का 25 ग्राम देसी घी के साथ सेवन कराने से बच्चे का जम्न आसानी से हो जाता है और कष्ट भी नही होता है।

अतिसार रोग: बच्चों के अतिसार रोग में मोच रस की 20 बून्दे मिश्री मिलाकर सुबह-शाम सेवन कराने से एक माह में उपरोक्त रोगों से छुटकारा मिल जाता है।

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