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बकायन से रोगों का उपचार

बकायन, के फल बडे होते हैं। इसका वृक्ष भी बडा होता है, जो नीम की शक्ल का होता है। इस वृक्ष पर मार्च अप्रैल के महीने में नीली आभा लिए सफेद फूल खिलते हैं। सितम्बर अक्टूबर में फल तैयार होते हैं, जो अंगूर के गुच्छों की तरह बडे, गोल तथा पकने पर पीले रंग के होते हैं, जिनमें गुटली होती है। इसका प्रयोग भी औषधि रुप में किया जाता है।

चर्म रोग एवं फोडे-फुंसियों: जिन लोगों को चर्म रोग हो जाता है अथवा फोडे फुंसियां निकल आती है।  ऐसे रोगी को बकायन के पत्तों का काढा बनाकर उसमें मिश्री मिला कर सुबह-शाम एक-एक कम सेवन कराने से 10 दिन में ही फोडे-फुंसियां साफ हो जाती है तथा चर्म रोग से छुटकारा मिल जाता है।

प्रमेह रोग: यह रोग महिलाओं को होता है। अत: प्रमेह रोगों में रोगी को बकायन के फलों का खूब सेवन करना चाहिए। एक माह के सेवन से ही प्रमेह का रोग खत्म हो जाता है।

अर्श तथा कुष्ठ रोग: अर्श व कुष्ठ रोग में इसके पत्तों का काढा बनाकर शहद के साथ सुबह-शाम रोगीको सेवन कराने से 60 दिन में ही अर्श और कुष्ठ रोग दूर हो जाते हैं।

श्वांस के रोग: फारसी: अरबी: दमा के रोगी को बकायन के पत्तों का रस निकाल कर उसे शहद में मिलाकर सुबह-शाम 2 चम्मच सेवन कराने से तीन माह में श्वांस के रोग से मुक्ति मिल जाती है और फिर कभी सांस नहीं उखडती।

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