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हडजोड से रोगों का उपचार

हडजोड की लम्बी लतायें होती है, जिन पर जुलाई अगस्त में फूल आते हैं। फल सितम्बर्के महीने में लगते हैं, जो मटर के दाने से कुछ बडे होते है। लाल रंग के उस फल में एक भूरे रंग का बीज होता है। इसका प्रयोग केवल औषधि रुप में ही किया जाता है।

नकसीर होने पर:  नकसीर के रोग में रोगी की नाक से खून बहने लगता है। ऐसे रोगी की नाक में हडजोड के पत्तों के रस की एक-एक बून्द डालने से खून बहना बन्द हो जाता है। दवा के रुप में नकसीर के रोगी को इसकी शखाओं का चूर्ण 2-2 ग्राम सुबह-शाम मिश्री के साथ ताजे पानी से सेवन कराने से तीन दिन में ही नकसीर का रोग खत्म हो जाता है।

पेट रोग: पेट रोगों के लिए इसके पत्तों एवं कोमल शाखाओं का रस निकालकर उसमें थोडा-सा काला नमक मिलाकर 2 चम्मच सुबह 2 चम्मच शाम को रोगी को 20 दिन दिन सेवन कराने से पेट के तमाम रोग दूर हो जाते है। चाहे पेट में दर्द हो, कब्ज हो, सूजन हो, बदहजमी हो, या गैस हो-सब ठीक हो जाते है।

संग्रहणी, रक्तपित्त एवं श्वांस के रोग: संग्रहणी एवं रक्तपित में हडजोड की शाखा का चूर्ण 2 ग्राम सुबह-शाम शहद के साथ मिलाकर रोगी को 20 दिन सेवन कराने से छूटकारा मिल जाता है, लेकिन श्वांस के रोगी को यह औषधि तीन माह सेवन करने पर ही श्वांस के रोग से छुटकारा मिलता है।

हड्डी टूटने पर: हड्डी टूट जाने पर हडजोड की शाखाओं के चूर्ण को देसी घी में खूब भूनकर उसमें हल्दी व मिश्री मिलाकर पाक तैयार कर लें। दो चम्मच सुबह और दो चम्मच शाम गाय के दूध के साथ सेवन करें। 20 दिन में हड्डी जुड जाएगी। लेप टूटी ही हड्डी पर करते रहें। हड्डी का जोड मजबूत हो जाएगा।

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