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गोरख इमली से रोगों का उपचार

गोरख इमली का वृक्ष बहुत बडा तथा नीचे से मोटा और ऊपर से शक्वांकार होता है। इसके पत्ते भने होते हैं। यह पूरा का पूरा वृक्ष अम्लीय होता है जिसके जड से लेकर पत्तों तक में खटास होती है। इसके फूल जनवरी फरवरी में खिलते हैं तथा फल लौकी के समान एक फुट तक लम्बा एवं कठोर छिलके का होता है। यह औषधि रुप में बहुत उपयोगी है।

लू एवं गर्मी:  गर्मी के मौसम में अक्सर लोगों को तेज गर्म हवाओं की वजह से लू लग जाती है अथवा शरीर में गर्मी बैठ जाती है। ऐसे रोगी को गोरख इमली का शर्बत बनाकर सुबह-शाम सेवन करना चाहिए। लू का असर खत्म हो जाता है और गर्मी दूर हो जाती है।

पैत्रिक रोग: जिन लोगों में पैत्रिक वंशानुक्रमण के अनुसार रोग उत्पन्न हो जाते हैं-ऐसे रोगियों को गोरख इमली की जड व छाल का काढा बनाकर सुबह-शाम 40 दिन तक बचाव के रुप में सेवन कराने से वह व्यक्ति उन रोगों से बचा रहेगा।

विषम ज्वर: जिन लोगों को विषम ज्वर(मलेरिया बुखार) हो जाता है तो डाक्टर अधिकतर उस रोगी को कुनेन की गोलियां देते हैं, उन गोलियों के सेवन के साथ-साथ गोरख इमली का हल्का काढा बनाकर उस रोगी को सुबह-शाम एक हफ्ते तक सेवन करायें तो विषम ज्वर जल्द ही ठीक हो जाता है।

मुंह साफ रखने में सहायक: बहुत से लोगों के मुंह से बदबू आती है। ऐसे व्यक्तियों को गोरख इमली के गोन्द का सेवन कराने से मुंह साफ हो जाता है।

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