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कंथार से रोगों का उपचार

कंथार के वृक्ष पर इतने बडे-बडे नुकीले कांटे होते हैं, जो किसी व्यक्ति के चुभने पर दर्द से बुरी तरह तडपा देता है। इसी वजह से इसका नाम हिंस्त्रा पडा है। यह भारत के सूखें स्थानों अर्थात रेतीले स्थानों पर पैदा होता है। इसकी जड एवं फल ही औषधि रुप में प्रयोग होते है।

गोधविष रोग: गोधविष रोग में रोगी की नाक में एक-एक बूंद इसके फल के रस को गर्म पानी में मिला कर सुबह-दोपहर-शाम तीन बार डालने से दस दिन के अन्दर ही गोधा विष नष्ट हो जाता है और रोगी को इस भयानक रोग से मुक्ति मिल जाती ह।

पक्षाघात व पेट दर्दपक्षाघात में तथा पेट दर्द में इसकी छाल का लेप करने से लाभ मिलता है। इस लेप के साथ –साथ रोगी को इसके फल का चूर्ण 3-3 ग्राम शहद के साथ सुबह-शाम सेवन कराने से तीन दिन में पेट दर्द दूर हो जाता है तथा 90 दिन में पक्षाघात रोग में सुधार होने लगता है और रोगी धीरे-धीरे ठीक होता जाता है।

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