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गुलैठी से रोगों का उपचार

गुलैठी को यष्ठी मधु भी कहते हैं। इसका पौधा 1 मीटर तक लम्बा होता है। इस पर हल्के गुलाबी रंग के फूल खिलते हैं। इसको जड बहुत मीठी होती है। यह तुर्किस्तान, ईरान तथा अफगानिस्तान में पैदा होती है। इसकी केवल जड ही औषधि रुप में प्रयोग की जाती है। इसकी तासीर ठण्डी होती है।

गले के रोग: कभी-कभी गले की आवाज रुक जाती है। भारी हो जाती है। गले में कांटे से चुभने लगते हैं। ऐसे रोगी को मुलेठी की जड मुंह में डालकर धीरे-धीरे चूसना चाहिए। तीन दिन के सेवन से ही गले की आवाज खुल जाएगी। इस जड का रस ठण्डा व असरकारक होता है।

मूत्र रोग: जिन लोगों को मूत्र रुक-रुककर जलन के साथ आता है-उनके द्वारा मुलैठी का काढा बना कर उसे गुलाब जल के साथ सुबह-शाम एक-एक सेवन करने से एक हफ्ते के अन्दर मूत्र के विकार दूर हो जाते हैं। मूत्र खुलकर आता है। जलन दूर हो जाती है।

चर्म रोग: चर्म रोग अक्सर शरीर में गर्मी अधिक पैदा होने के कारण उत्पन्न होते हैं। ऐसे रोगी को मुलैठी का शर्बत बनाकर सुबह-शाम एक-एक कप सेवन कराने से 20 दिन में ही चर्म रोग दूर हो जाते हैं। शरीर की बढी हुई गर्मी निकल जाती है।

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