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कनफोटा से रोगों का उपचार

कनफोटा वर्षाकाल का आरोही लता जाति का एक वनस्पति है, जिस पर सफेद रंग के फूल जुलाई अगस्त के महीने में खिलते हैं। इसके फल तीन धारीवाले होते है, जिनके पकने पर काले रंग का बीज निकलता है। यह फल सर्दी के मौसम में लगते है। इसकी जड का ही औषधि रुप में प्रयोग किया जाता है।

सिर दर्द: सिर में कैसा ही दर्द हो? आधे सिर का हो या पूरे सिर का। कनफोटा के पत्तों को पीसकर माथे पर लेप करने से सिर का दर्द दूर हो जाता है।

मासिक धर्म की विकृति: जब महिलाओं का मासिक धर्म सही समय पर नहीं होता तो कितने ही रोग उत्पन्न होने का खतरा बना रहता है। ऐसी महिलाओं को इस जड का काढा बनाकर सुबह-शाम दस दिन तक सेवन करने से मासिक धर्म सही समय पर होने लगता है।

कमर दर्द तथा गर्भाशय संकोच निवारण: जिन महिलाओं के प्रसव के बाद कमर में दर्द होता है तथा गर्भाशय फैल जाता है-ऐसी महिलाओं द्वारा 5-5 ग्राम कनफोटा की जड का चूर्ण सुबह शाम दूध के साथ सेवन करने से 40 दिन के प्रयोग से कमर का दर्द दूर हो जाता है तथा गर्भाशय संकुचित होकर अपनी असली स्थिति में आ जाता है।

वातरोग, अर्श, आमवात एवं अश्मरी रोग: उपरोक्त रोग उत्पन्न होने पर कनफोटा की जड का चूर्ण 5-5 ग्राम काला नमक मिलाकर रोगी को सुबह शाम सेवन कराने से 20 दिन में ही उपरोक्त सारे रोग दूर हो जाते हैं।

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