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लाल चन्दन से रोगोपचार

लाल चन्दन का वृक्ष मध्यम आकार का होता है। मार्च-अप्रैल के महीने में इसमें छोटे-छोटे फूल मंजरियों की शक्ल में खिलने लगते हैं। वही फूल आगे चलकर फलियों का रुप धारण कर लेते हैं। इसकी तासीर ठण्डी होती है।

ये वृक्ष प्राकृतिक होते हैं जो दक्षिण भारत के केरल, कर्नाटक एवं चिंगलपुर की पहाडियों में पाये जाते है।

यह अपने गुणों के कारण ही औषधि रुप में प्रयोग किया जाता है।

खांसी और गर्मी बुखार: गर्मी के मौसम में अक्सर लोगों को बुखार हो जाता है। शरीर में अधिक ताप उत्पन्न हो जाता है। खांसी हो जाती है। ऐसे रोगी को इसकी फलियों का चूर्ण बनाकर 5 ग्राम सुबह-शाम दूध के साथ सेवन कराने से 10 दिन में ही खांसी दूर हो जाती है। बुखार चला जाता है तथा शरीर की गर्मी कम हो जाती है।

चर्म रोगों एवं फोडे-फुंसियां : गर्मी के मौसम में भीषण गर्मी पडने के कारण शरीर में चर्म रोग में लाल चन्दन को घिसकर उसका लेप शरीर पर कर देने से फोडे-फुंसियां कुछ ही दिनों में खत्म हो जाते है।

चर्म रोग भी 20 दिन के लेप करने से दूर हो जाता है।

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