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माजूफल से रोगों का उपचार

माजूफल वास्तव में कोई फल नहीं होता बल्कि एक जंगली वृक्ष की शाखा का एक विशेष प्रकार के कीडे के द्वारा छेद करने और उन छेदों में अपने अण्डे रखने से वहां गांठे उभर आती है। उन्हीं गांठो को माजूफल कहते हैं। औषधि प्रयोग में वह माजूफल श्रेष्ठ माना जाता है, जिसमें कीडे मौजूद हों। यह वृक्ष अधिकतर तुर्की, सीरिया, फारस तथा यूनान में पाया जाता है। इसकी दवा की खुराक बच्चों के लिए एक ग्राम तथा बडों के लिए दो ग्राम काफी है।

लिकोरिया एवं रक्त प्रदर: महिलाओं के लिए ये दोनों ही रोग जीवनपाती होते हैं। लिकोरिया में योनि के रास्ते सफेद बदबूदार पानी आता है। ऐसी महिलाओं को माजूफल के चूर्ण की एक छोटी सी पोटली बनाकर सुबह शाम योनि के अन्दर रख लेने से दो माह के प्रयोग से ही दोनों भयंकर बीमारियां दूर हो जाती है। वैसे माजूफल के पानी से योनि को धोने से भी लाभ मिलाता है।

पेचिश एवं संग्रहणी रोग: पुरानी पेचिश हो जाने पर तथा संग्रहणी के रोग में रोगी को 5-5 ग्राम माजूफल के चूर्ण का सुबह-शाम सेवन कराने से 10 दिन में पेचिश दूर हो जाती है। संग्रहणी का रोग खत्म हो जाता है।

बाल काले करने में: आज कल कम उम्र में ही बाल सफेद होने लगते हैं। बाल सफेद होने से रोकने के लिए माजूफल के चूर्ण को पानी में मिलाकर उससे बाल धोने से एक माह के अन्दर सफेद बाल काले हो जाते है।

योनि स्त्राव: जिन महिलाओं को योनि स्त्राव अधिक होता है-ऐसी महिलाओं को माजूफल का चूर्ण बनाकर 5-5 ग्राम सुबह शाम शहद के साथ सेवन करने से 20 दिनों में स्त्राव बहना कम हो जाता है।

लिकोरिया में भी माजूफल के चूर्ण का सेवन काफी लाभदायक होता है। 90 दिन के सेवन से लिकोरिया का रोग खत्म हो जाता है।

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